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यमुना में सीवर रोकने के लिए अमित शाह ने ₹8,941 करोड़ की परियोजनाएं शुरू कीं

गृह मंत्री ने नजफगढ़ में दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया और मई 2029 तक यमुना साफ करने का लक्ष्य रखा।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (फ़ाइल फ़ोटो)
एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Vraj Acharya, WELL Labs / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. पैकेज में दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाएं हैं, जिनकी लागत ₹8,941.22 करोड़ है।
  2. ओखला में नया 124 एमजीडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सबसे बड़ी परियोजना है।
  3. शाह ने कहा कि सरकार मई 2029 तक यमुना को साफ कर देगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को दिल्ली में ₹8,941 करोड़ की सीवर और पानी से जुड़ी परियोजनाएं शुरू कीं। दिल्ली सरकार का कहना है कि इनसे आखिरकार नालों का बिना साफ किया पानी यमुना में जाना बंद हो जाएगा।

नजफगढ़ इलाके में हुए कार्यक्रम में शाह ने दिल्ली जल बोर्ड की ₹2,827.11 करोड़ की 10 परियोजनाओं का उद्घाटन किया और ₹6,114.11 करोड़ की 33 परियोजनाओं का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि सरकार मई 2029 तक यमुना को साफ कर देगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता उनके साथ थीं।

क्या बनेगा

सबसे बड़ी परियोजना ओखला में रोज़ाना 124 मिलियन गैलन (एमजीडी) क्षमता वाला नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट है, जिसकी लागत ₹1,161 करोड़ है। आठ मौजूदा प्लांटों को ₹1,041 करोड़ से अपग्रेड किया जाएगा, जिससे उनकी कुल क्षमता 78.2 एमजीडी से बढ़कर 140.8 एमजीडी हो जाएगी। इसका फायदा करीब 78.5 लाख लोगों को मिलेगा।

बाहरी दिल्ली के लिए ₹3,113.67 करोड़ के 29 विकेंद्रीकृत ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशन बनेंगे। ये 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों के करीब 36 लाख लोगों के लिए हैं, जिनमें से कई के पास आज तक सीवर कनेक्शन नहीं है। इसके अलावा ₹1,691 करोड़ से 1,034 किलोमीटर नई सीवर लाइनें बिछेंगी।

चंद्रावल में ₹298.3 करोड़ से रोज़ाना 477 मिलियन लीटर का जल शोधन संयंत्र बनेगा, जो 1935 और 1955 में बने संयंत्रों की जगह लेगा और करीब 22 लाख लोगों को पानी देगा। मुंडका में ₹225.02 करोड़ से 4.5 किलोमीटर लंबा ट्रंक ड्रेन भी बनेगा।

घाटों से नालों तक

दिल्ली के जल मंत्री परवेश साहिब सिंह का कहना रहा है कि सिर्फ घाट साफ करने से यमुना नहीं लौटेगी, असली लक्ष्य सीवर की हर बूंद को नदी तक पहुंचने से पहले इकट्ठा करना, साफ करना और दोबारा इस्तेमाल करना है। उनके मुताबिक काम दो से ढाई साल में पूरे होंगे और करीब डेढ़ साल में असर दिखने लगेगा।

यह शुरुआत 18 अक्टूबर के “चलो यमुना” अभियान के चार दिन बाद हुई, जब 35,000 से ज़्यादा लोगों ने वज़ीराबाद से चिल्ला तक नदी किनारे 70 जगहों से करीब 76,755 किलो सूखा कचरा हटाया था।

सिंह ने “बर्थडे विद यमुना” योजना का भी ऐलान किया है, जिसमें नदी किनारे झोपड़ियां बनाई जाएंगी ताकि लोग वहां जन्मदिन मना सकें। उन्होंने कहा कि वे 7 नवंबर को अपना जन्मदिन वहीं मनाएंगे।

दिल्ली और केंद्र की कई सरकारें यमुना की सफाई के वादे करती रही हैं। इस पैकेज की असली परीक्षा यह होगी कि प्लांट समय पर बनें और बनने के बाद पूरी क्षमता से चलें।