नीतिबैंकिंग
2.7 लाख पंचायतों और शहरों में बैंक शिविर शुरू: जन धन, बीमा और री-केवाईसी एक जगह
वित्त मंत्रालय का यह अभियान बुधवार से 31 दिसंबर तक चलेगा। रबी सीज़न से पहले इसमें लावारिस जमा राशि और किसान क्रेडिट कार्ड पर भी ज़ोर है।
मुख्य बातें
- बैंक 31 दिसंबर तक 2.70 लाख ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में शिविर लगाएंगे।
- शिविरों में जन धन खाते खोले जा सकेंगे, बीमा और पेंशन योजनाओं में नामांकन होगा और री-केवाईसी की जा सकेगी।
- रबी सीज़न से पहले पीएम-किसान लाभार्थियों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड और फ़सल बीमा पर भी ज़ोर है।
वित्त मंत्रालय के एक नए अभियान के तहत बैंकों ने बुधवार से 2.70 लाख ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में शिविर लगाने शुरू कर दिए। मकसद है कि हर पात्र व्यक्ति वित्तीय समावेशन की प्रमुख योजनाओं से जुड़ जाए।
वित्तीय समावेशन योजनाओं का यह संतृप्ति अभियान मंत्रालय का वित्तीय सेवा विभाग चला रहा है और यह 31 दिसंबर तक चलेगा। मंत्रालय ने कहा कि यह “आखिरी छोर तक नागरिकों को सशक्त बनाने” और बैंकिंग से बाहर लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में लाने की सरकार की प्रतिबद्धता दिखाता है।
शिविरों में क्या मिलेगा
शिविरों में लोग प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत ज़ीरो बैलेंस बचत खाते खोल सकेंगे और दो सस्ती बीमा योजनाओं, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, के साथ अटल पेंशन योजना में नामांकन करा सकेंगे। बैंक कर्मचारी बीमा नामांकनों से आधार जोड़ेंगे, जन धन और दूसरे बचत खातों की री-केवाईसी करेंगे, जहां सेंट्रल केवाईसी नंबर बाकी है वहां उसे बनाएंगे, और बचत खातों व लॉकरों के नॉमिनी अपडेट करेंगे।
बैंकों में पड़ी लावारिस रकम और दूसरी वित्तीय संपत्तियों पर “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” थीम के तहत और डिजिटल धोखाधड़ी पर जागरूकता सत्र भी होंगे।
खेती के कर्ज़ पर ज़ोर
शिविरों में रबी बुवाई के मौसम को ध्यान में रखकर खेती से जुड़ा हिस्सा भी है। बैंक किसान क्रेडिट कार्ड के आवेदन जुटाएंगे, ताकि पीएम-किसान का हर पात्र लाभार्थी इसके दायरे में आ जाए, और साथ ही किसानों को प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना में जोड़ेंगे।
मंत्रालय ने नामांकन के लक्ष्य या लगने वाले शिविरों की संख्या नहीं बताई है।