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गन्ना किसानों की मांगों की जांच के लिए केंद्र ने रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति बनाई

समिति गन्ने का दाम और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांगों के साथ यह भी देखेगी कि मिलें गन्ना कैसे तौलती हैं और रिकवरी कैसे मापती हैं।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
समिति के प्रमुख अर्थशास्त्री रमेश चंद (फ़ाइल फ़ोटो)
समिति के प्रमुख अर्थशास्त्री रमेश चंद (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: धनंजय बिन्द / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद समिति के अध्यक्ष होंगे।
  2. समिति गन्ने का दाम और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांगों की समीक्षा करेगी।
  3. यह समिति कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों से बातचीत के बाद बनी है।

केंद्र ने बुधवार को कृषि अर्थशास्त्री रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति बनाई, जो गन्ना किसानों की शिकायतों की जांच करेगी। यह कदम कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसानों के बेहतर दाम की मांग लेकर दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के बाद उठाया गया।

रमेश चंद 2015 से 2026 तक नीति आयोग के सदस्य रहे। इससे पहले वे आईसीएआर के राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र एवं नीति अनुसंधान संस्थान के निदेशक और पंद्रहवें वित्त आयोग के सदस्य थे। समिति के बाकी सदस्य कृषि आयुक्त और दो संयुक्त सचिव हैं: खाद्य विभाग में चीनी देखने वाले और उपभोक्ता मामले विभाग में विधिक माप-विज्ञान देखने वाले।

समिति क्या देखेगी

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया कि समिति लागत को ध्यान में रखते हुए गन्ने का लाभकारी दाम बढ़ाने की मांग और चीनी के एक्स-मिल न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन की मांग की समीक्षा करेगी। वह यह भी जांचेगी कि मिलें चीनी रिकवरी की जांच और रिपोर्टिंग कैसे करती हैं, गन्ना कैसे तौला जाता है और कांटों का कैलिब्रेशन और निरीक्षण कैसे होता है, और मशीन से कटे गन्ने के वज़न में मिलें जो कटौती करती हैं उसका किसानों के भुगतान पर क्या असर पड़ता है।

समिति किसान संगठनों, मिल संघों, राज्य सरकारों और विशेषज्ञों से सलाह ले सकती है। उससे “यथाशीघ्र” रिपोर्ट देने को कहा गया है, कोई तय समय-सीमा नहीं है।

पृष्ठभूमि

यह फैसला उत्तर कर्नाटक में हफ्तों चले आंदोलन के बाद आया है। 29 सितंबर को हुबली में एक प्रदर्शन में किसान संगठनों ने 2026–27 के लिए गन्ने का दाम ₹5,500 प्रति टन करने और चीनी का बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग की थी। खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने उन्हें दिल्ली बुलाया था और एक्स पर लिखा था: “अगर आप दिल्ली आएंगे, तो हम आपसे बात करेंगे।” उन्होंने याद दिलाया है कि केंद्र ने मई में उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बढ़ाकर ₹365 प्रति क्विंटल किया था।

मूल दस्तावेज़