नीतिकृषि
हरियाणा-यूपी में पराली जलाने के मामले घटे, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बढ़े, केंद्र की चेतावनी
शिवराज सिंह चौहान और भूपेंद्र यादव ने राज्यों के कृषि मंत्रियों से कहा कि मशीनें कागजों पर नहीं, खेतों में चलनी चाहिए, क्योंकि धान की ज़्यादातर कटाई अभी बाकी है।

मुख्य बातें
- 15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं पिछले साल से 53.3% कम रहीं।
- मध्य प्रदेश और राजस्थान में मामले बढ़े, दोनों राज्यों से विशेष कार्ययोजना बनाने को कहा गया।
- 2026-27 के लिए तय ₹592.57 करोड़ में से ₹430.87 करोड़ राज्यों को जारी हो चुके हैं।
हरियाणा में इस सीज़न पराली जलाने की घटनाएं आधी से भी कम रह गई हैं, लेकिन केंद्र ने मंगलवार को साफ किया कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। धान की बड़ी फसल अभी खेतों में खड़ी है और दो राज्यों में हालात उलटी दिशा में जा रहे हैं।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कृषि भवन में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के कृषि मंत्रियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक की। इसमें कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा और पर्यावरण सचिव नरेंद्र भूषण भी मौजूद थे।
आंकड़े क्या कहते हैं
15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं 53.3% और उत्तर प्रदेश में करीब 32% घटीं। पंजाब में गिरावट कम रही। मध्य प्रदेश और राजस्थान में घटनाएं बढ़ीं, जिस पर बैठक में चिंता जताई गई।
चौहान ने दोनों राज्यों से प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान कर तुरंत विशेष कार्ययोजना शुरू करने को कहा। जिन राज्यों में स्थिति बेहतर है, उन्हें भी ढील न देने की हिदायत दी गई, क्योंकि फसल का बड़ा हिस्सा अभी कटना बाकी है।
खेत में मशीनें
केंद्र अब तक राज्यों को 3.54 लाख से ज़्यादा फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें दे चुका है, जिनमें इस साल की 26,109 मशीनें शामिल हैं। चौहान ने कहा, “केवल यह कह देना कि पराली मत जलाओ, काफी नहीं होगा।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “मशीनें खेत में चलें, कागजों में नहीं”। उन्होंने खराब पड़ी मशीनों की मरम्मत कराने और कस्टम हायरिंग सेंटरों के ज़रिए छोटे व सीमांत किसानों को किफायती दर पर मशीनें देने को कहा।
उन्होंने पंजाब से जल्द उपयोगिता प्रमाणपत्र भेजने को कहा, ताकि अगली किस्त जारी हो सके। 2026-27 के लिए आवंटित ₹592.57 करोड़ में से ₹430.87 करोड़ जारी हो चुके हैं, और बैठक में यह बात उठी कि राज्य पैसा खर्च करने में धीमे हैं।
चौहान चाहते हैं कि पराली को संसाधन की तरह देखा जाए। उन्होंने किसानों को सीधे पेलेट को-फायरिंग वाले थर्मल बिजलीघरों, कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों और दूसरी पीढ़ी के एथेनॉल संयंत्रों से जोड़ने, सूखा प्रभावित इलाकों में पराली को पशुओं के चारे के लिए रखने, और देर से पकने वाली पूसा-44 की जगह पूसा 2090 और पीआर126 जैसी जल्दी तैयार होने वाली किस्मों को बढ़ावा देने को कहा।
ज़मीन पर निगरानी
यादव ने दस जिलों में सख्त निगरानी और कार्रवाई के निर्देश दिए: पंजाब के संगरूर, तरनतारन, अमृतसर, पटियाला और गुरदासपुर, और हरियाणा के कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और फतेहाबाद।
उन्होंने कहा कि निगरानी सिर्फ उपग्रह के आंकड़ों के भरोसे नहीं हो सकती, खासकर दोपहर 3 बजे के बाद, जब उपग्रह की कोई पास उपलब्ध नहीं होती। इस कमी को ज़मीनी गश्त और उड़न दस्ते पूरा करें। पराली के आंकड़े वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से साझा किए जाएं, साथ ही कटाई के समय और मौसम का पूर्वानुमान भी, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की हवा पर असर डालते हैं।
जिला कलेक्टरों से कहा गया है कि वे जल्द बैठकें करें और टीमों को गांवों में उतारें।
मूल दस्तावेज़
- Union Ministers Shivraj Singh Chouhan and Bhupender Yadav jointly review stubble management (Hindi release)PIB, Ministry of Agriculture and Farmers Welfare, 13 अक्टूबर 2026