नीतिआंतरिक सुरक्षा
सेना नवंबर के मध्य तक 12 राज्यों के 600 सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण देगी
गृह मंत्रालय और सेना की इस पहली संयुक्त पायलट पहल में ड्रोन, हवाई हमले और रासायनिक खतरों से निपटना सिखाया जाएगा। लक्ष्य 60,000 सिविल डिफेंस वॉलन्टियर्स तक पहुंचना है।

मुख्य बातें
- सेना 600 सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करेगी, 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से 50-50।
- हर ट्रेनर आगे 100 वॉलन्टियर्स को सिखाएगा, यानी कुल 60,000 लोगों तक पहुंच संभव।
- प्रशिक्षण में ड्रोन, हवाई हमले के खतरे और सीबीआरएन आपात स्थितियां शामिल हैं।
देश के सिविल डिफेंस वॉलन्टियर्स को पहली बार सेना प्रशिक्षण देगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार दोपहर इस पायलट योजना की घोषणा की।
पहले चरण में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 50-50, यानी कुल 600 सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनर्स नवंबर के दूसरे सप्ताह तक सेना के तय प्रशिक्षण संस्थानों में तीन दिन का विशेष कोर्स करेंगे। इसके बाद हर ट्रेनर अपने राज्य में 100 वॉलन्टियर्स को प्रशिक्षित करेगा। यह सिलसिला योजना के मुताबिक चला तो इन 12 क्षेत्रों के करीब 60,000 वॉलन्टियर्स तक नए कौशल पहुंचेंगे। मंत्रालय ने ढांचागत मास्टर ट्रेनर मॉडल पर बने इसी गुणक प्रभाव को योजना की मुख्य खासियत बताया, क्योंकि सेना से प्रशिक्षित एक छोटा समूह इस कोर्स को सेना की अपनी पहुंच से कहीं आगे ले जा सकता है।
पहले दौर में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मेघालय, सिक्किम, असम, उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं।
लाल किले से प्रशिक्षण मैदान तक
यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण के बाद आया है, जिसमें उन्होंने आधुनिक प्रणालियों, तकनीक और नई सुरक्षा चुनौतियों की तैयारी से लैस एक वाइब्रेंट सिविल डिफेंस नेटवर्क बनाने की बात कही थी।
इसे गृह मंत्रालय का अग्निशमन सेवा, सिविल डिफेंस एवं गृह रक्षक महानिदेशालय सेना के साथ मिलकर चला रहा है। मंत्रालय ने इसे अपनी तरह की पहली पायलट पहल बताया, जो सेना के ऑपरेशनल अनुभव को वॉलन्टियर नेटवर्क से जोड़ती है।
वॉलन्टियर्स क्या सीखेंगे
कोर्स तीन हिस्सों में बंटा है। पहला खतरों के प्रति जागरूकता का है, जिसमें आधुनिक और हाइब्रिड युद्ध, ड्रोन और हवाई हमले के खतरे शामिल हैं। दूसरा सुरक्षा और आपात प्रतिक्रिया का है: अहम बुनियादी ढांचे की हिफाजत, अग्नि सुरक्षा, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) खतरों की जानकारी, घायलों की देखभाल और खोज व बचाव।
तीसरा हिस्सा संचार और समन्वय का है। इसमें आपात संचार, साइबर हाइजीन और डिजिटल मजबूती, नागरिक-सैन्य तालमेल और इंसिडेंट कमांड सिखाए जाएंगे।
मंत्रालय के अनुसार मकसद सिविल डिफेंस कर्मियों को मौजूदा सुरक्षा खतरों, शत्रुतापूर्ण हालात और आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार करना और अहम ढांचे की मिलकर रक्षा करना है।
आगे क्या
पहले ट्रेनर्स का कोर्स करीब तीन हफ्तों में पूरा होना है। मंत्रालय ने कहा कि पायलट के नतीजों के आधार पर योजना को चरणबद्ध तरीके से बाकी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक बढ़ाया जाएगा। दूसरा चरण कब शुरू होगा और इस पर कितना खर्च आएगा, यह अभी नहीं बताया गया है।
मूल दस्तावेज़
- In line with the vision of Prime Minister Shri Narendra Modi, the work to establish a vibrant Civil Defence Network in the country is set to beginPIB (Ministry of Home Affairs), 23 अक्टूबर 2026