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एक बार इस्तेमाल वाले मेडिकल उपकरण दोबारा न चलाएं अस्पताल, डीजीएचएस ने राज्यों से कहा

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के मुताबिक कुछ निजी और कॉरपोरेट अस्पताल कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और न्यूरोसर्जरी में एक बार के लिए बने उपकरणों को स्टरलाइज़ करके फिर इस्तेमाल कर रहे हैं।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
नई दिल्ली में निर्माण भवन, जहाँ स्वास्थ्य मंत्रालय है (फ़ाइल फ़ोटो)
नई दिल्ली में निर्माण भवन, जहाँ स्वास्थ्य मंत्रालय है (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: শরদিন্দু ভট্টাচার্য্য / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. डीजीएचएस ने एक बार इस्तेमाल वाले मेडिकल उपकरणों और डिस्पोज़ेबल सर्जिकल सामान के दोबारा इस्तेमाल के ख़िलाफ़ चेताया है।
  2. यह चलन कुछ निजी और कॉरपोरेट अस्पतालों में कार्डियोलॉजी और न्यूरोसर्जरी जैसे विभागों में पाया गया।
  3. राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से नियमों को सख़्ती से लागू करने को कहा गया है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने देश भर के अस्पतालों को उन मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल सामान को दोबारा इस्तेमाल करने के ख़िलाफ़ चेताया है, जो सिर्फ़ एक बार इस्तेमाल के लिए बनाए जाते हैं। उसने कहा है कि इससे मरीज़ों की जान जोखिम में पड़ती है और सरकारी व निजी, दोनों तरह के अस्पतालों में यह रुकना चाहिए।

राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों को लिखी चिट्ठी में महानिदेशालय ने कहा कि कुछ निजी और कॉरपोरेट अस्पताल कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और न्यूरोसर्जरी जैसे विभागों में एक बार इस्तेमाल वाले सामान को स्टरलाइज़ करके फिर से इस्तेमाल कर रहे हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाले डीजीएचएस ने चिंता के चार क्षेत्र गिनाए: मरीज़ों की सुरक्षा, संक्रमण पर नियंत्रण, मेडिकल उपकरणों से जुड़े नियमों का पालन और इलाज की लागत। उसने कहा कि जिन चीज़ों को कभी दोबारा साफ़ करके इस्तेमाल करने के लिए बनाया ही नहीं गया, उन्हें फिर चलाने से संक्रमण फैल सकता है और प्रक्रिया के दौरान उपकरण ख़राब हो सकता है।

चिट्ठी में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से सरकारी और निजी, दोनों तरह के अस्पतालों में मौजूदा नियमों को सख़्ती से लागू करने को कहा गया है।

महानिदेशालय ने सार्वजनिक तौर पर किसी अस्पताल का नाम नहीं लिया है, और जितनी जानकारी सामने आई है उसमें किसी नए दंड का ज़िक्र नहीं है। ऐसे सामान को दोबारा इस्तेमाल करते रहने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई अब उन राज्य और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासनों के हाथ में है, जिन्हें यह चिट्ठी भेजी गई है।