नीतिमत्स्य पालन
देश की ज्यादातर मछली अंतर्देशीय राज्यों में, पर निर्यात में हिस्सा सिर्फ 2%: राजीव रंजन सिंह
मोहन यादव के साथ भोपाल में मत्स्य निवेश सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ने मध्य प्रदेश के 49 जलाशयों के विकास की ₹87.56 करोड़ की योजना को मंजूरी सौंपी और निर्यात की पांच प्राथमिकताएं बताईं।

मुख्य बातें
- केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि मत्स्य निर्यात में अंतर्देशीय राज्यों का हिस्सा सिर्फ 2% है।
- मध्य प्रदेश के 49 जलाशयों के विकास के लिए ₹8,755.60 लाख की परियोजना को मंजूरी मिली।
- मध्य प्रदेश ने मत्स्य निवेश और निर्यात दिशानिर्देश, 2026 जारी किए।
देश में ज्यादातर मछली अंतर्देशीय राज्यों में पैदा होती है, लेकिन उसका बहुत कम हिस्सा विदेश जाता है। केंद्रीय मत्स्य मंत्री राजीव रंजन सिंह ने शुक्रवार को भोपाल में यह बात कही, जहां उन्होंने और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस क्षेत्र में निवेशकों और निर्यातकों को लाने के लिए एक सम्मेलन की शुरुआत की।
सिंह ने कहा कि भारत 130 देशों को मछली निर्यात करता है, लेकिन मत्स्य निर्यात में अंतर्देशीय राज्यों का हिस्सा सिर्फ 2% है, जबकि इन राज्यों में मछली उत्पादन 147% बढ़ा है। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन को एक उद्योग के रूप में मानना और विकसित करना होगा।
मंत्रालय के मुताबिक 2024-25 में भारत में 197.75 लाख टन मछली का उत्पादन हुआ, जिसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन का योगदान 151.60 लाख टन, यानी करीब तीन-चौथाई रहा। 2025-26 में समुद्री खाद्य निर्यात ₹73,890 करोड़ का रहा।
जलाशयों के लिए पैसा
मत्स्य निवेशक और निर्यातक सम्मेलन में सिंह ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत राज्य के 49 जलाशयों के विकास के लिए ₹8,755.60 लाख और पांच अमृत सरोवरों के लिए ₹69 लाख की प्रशासनिक मंजूरी यादव को सौंपी। दोनों ने राज्य के मत्स्य निवेश और निर्यात दिशानिर्देश, 2026 और अंतर्देशीय राज्यों की निर्यात क्षमता पर केंद्र की मानक संचालन प्रक्रियाएं भी जारी कीं। एकीकृत केज कल्चर इकाइयों का ऑनलाइन उद्घाटन हुआ।
सिंह ने निर्यात की पांच प्राथमिकताएं गिनाईं: मीठे पानी की उपयुक्त प्रजातियां और लक्षित बाजार चुनना, संग्रह केंद्र और बड़े प्रोसेसिंग हब बनाना, किसानों को निवेशकों और निर्यातकों से जोड़ना, शुरू से गुणवत्ता प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी पक्की करना, और साफ लक्ष्यों के साथ विदेशी खरीदारों से लगातार संपर्क रखना।
यादव ने कहा कि ढाई साल में राज्य की सिंचाई क्षमता बढ़कर 60 लाख हेक्टेयर हो गई है और लक्ष्य 100 लाख हेक्टेयर का है। उन्होंने मध्य प्रदेश मत्स्य नीति 2026 की घोषणा की, जिसमें मत्स्य उद्यमों को जमीन और अन्य सुविधाएं मिलेंगी। सम्मेलन में राज्य भर से 1,000 से ज्यादा मछली पालक पहुंचे।
मूल दस्तावेज़
- Fisheries Investors & Exporters Conclave 2026 to Boost Investment, Value Addition and Exports from Inland FisheriesPIB (Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying), 23 अक्टूबर 2026