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छह माह तक के शिशुओं के आहार में अतिरिक्त सुक्रोज और फ्रक्टोज पर रोक का प्रस्ताव

एफएसएसएआई के मसौदा संशोधन के तहत सबसे छोटे शिशुओं के उत्पादों में ये दोनों शर्कराएं नहीं मिलाई जा सकेंगी। लोग 60 दिन में अपनी राय दे सकते हैं।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित

मुख्य बातें

  1. मसौदे के मुताबिक छह माह तक के शिशुओं के उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज "नहीं मिलाए जाएंगे"।
  2. मौजूदा नियम कार्बोहाइड्रेट स्रोत के तौर पर जरूरत होने पर दोनों को तय सीमा में मिलाने की छूट देते हैं।
  3. आपत्तियां और सुझाव 60 दिन के भीतर मांगे गए हैं।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने प्रस्ताव रखा है कि छह माह तक के शिशुओं के लिए बने खाद्य उत्पादों में निर्माता सुक्रोज और फ्रक्टोज न मिला सकें।

शुक्रवार को भारत के राजपत्र में प्रकाशित खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण हेतु खाद्य) संशोधन विनियम, 2026 के मसौदे में एक नया प्रावधान प्रस्तावित है: “6 माह तक की आयु के शिशुओं के लिए बने उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज नहीं मिलाए जाएंगे।”

जिन 2020 के विनियमों में संशोधन हो रहा है, वे जन्म से 24 महीने तक के बच्चों के शिशु पोषण उत्पादों के लिए संरचना, गुणवत्ता और सुरक्षा के मानक तय करते हैं। इनमें लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर पसंदीदा कार्बोहाइड्रेट हैं, जबकि कार्बोहाइड्रेट स्रोत के रूप में जरूरत होने पर तय सीमा में सुक्रोज या फ्रक्टोज मिलाया जा सकता है। मसौदा पहले छह महीनों के लिए यह विकल्प खत्म करता है।

नियामक ने कहा कि शुरुआती छह महीने विकास के लिए बेहद अहम होते हैं और इस बदलाव का मकसद शिशु उत्पादों को गैरजरूरी अतिरिक्त शर्करा से मुक्त रखना है। उसने इस कदम को कम उम्र में अतिरिक्त चीनी के संपर्क से जुड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं से जोड़ा, जिनमें बचपन के मोटापे से जुड़े जोखिम भी हैं। साथ ही कहा कि यह पहले छह महीने केवल स्तनपान की सलाह का पूरक है।

एफएसएसएआई ने कहा कि वह चाहता है कि निर्माता ऐसे फॉर्मूलेशन अपनाएं जिनमें छोटे शिशुओं की पोषण जरूरतें सबसे ऊपर हों। नई रोक सिर्फ छह माह तक के शिशुओं के उत्पादों पर लागू होगी।

मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए खुला है। राजपत्र की प्रतियां जनता को उपलब्ध होने की तारीख से 60 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव भेजे जा सकते हैं, जिन पर एफएसएसएआई नियम को अंतिम रूप देने से पहले विचार करेगा।

उसी दिन प्रकाशित एक अलग मसौदे में नियामक ने चाय में दो कीटनाशकों के अधिकतम अवशेष सीमा का प्रस्ताव रखा: एसिटामिप्रिड के लिए 20 मिलीग्राम/किलो और इमिडाक्लोप्रिड के लिए 50 मिलीग्राम/किलो।

मूल दस्तावेज़