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चंडीगढ़ की सुखना और यूपी की सौज झील के साथ भारत में 103 रामसर स्थल

सुखना चंडीगढ़ की पहली अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि बनी। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार शाम दोनों के जुड़ने की घोषणा की।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
सुखना झील, चंडीगढ़
सुखना झील, चंडीगढ़Photo: Original: Biswarup Ganguly Derivative work: Unpeti / Wikimedia Commons, CC BY 3.0

मुख्य बातें

  1. सुखना आर्द्रभूमि और सौज झील को रामसर स्थल का दर्जा मिला, देश में कुल संख्या 103 हुई।
  2. सुखना चंडीगढ़ का पहला रामसर स्थल है।
  3. यह आर्द्रभूमि करीब 565 एकड़ में फैली है और इसका जलग्रहण क्षेत्र 10,395 एकड़ है।

सुखना आर्द्रभूमि (चंडीगढ़) और सौज झील (उत्तर प्रदेश) के अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची में जुड़ने के साथ भारत में रामसर स्थलों की संख्या 103 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

इन दो नामों के साथ गिनती 101 से बढ़कर 103 हुई है। सुखना चंडीगढ़ का पहला रामसर स्थल है।

यादव ने एक्स पर लिखा, “मैं उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ को इस उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं।” उन्होंने कहा कि ये नाम दिखाते हैं कि सरकार जैव विविधता के संरक्षण, जल व जलवायु सुरक्षा बढ़ाने और स्थानीय आजीविका बनाए रखने में आर्द्रभूमियों को कितना महत्व देती है। पर्यटकों से उन्होंने कहा, “प्रिय यात्रियो, अगली बार जब आपके पास दो-एक दिन हों, तो सुखना और सौज ज़रूर जाइए।”

शिवालिक की तलहटी में बसी सुखना करीब 565 एकड़ में फैली है और इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 10,395 एकड़ है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 1988 में इसे राष्ट्रीय आर्द्रभूमि घोषित किया था, और सुखना वन्यजीव अभयारण्य इसी के जलग्रहण क्षेत्र में है।

नामांकन में करीब एक साल लगा। पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की अध्यक्षता वाले चंडीगढ़ राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने सितंबर 2025 में प्रस्ताव मंज़ूर किया था। इसके बाद यूटी के वन विभाग ने विस्तृत प्रस्ताव केंद्र को भेजा, जिसने विदेश मंत्रालय की सहमति के साथ इसे मंज़ूरी दी और फिर यह रामसर सचिवालय भेजा गया।

रामसर कन्वेंशन 1971 में ईरान के शहर रामसर में अपनाया गया था और भारत में 1 फ़रवरी 1982 से लागू हुआ।

मूल दस्तावेज़