नीतिमत्स्य पालन
दक्षिणी हिंद महासागर मत्स्य समझौते का पूर्ण सदस्य बनेगा भारत
केंद्र ने एसआईओएफए में शामिल होने को मंज़ूरी दी है। इससे भारतीय झंडे वाले जहाज़ समझौते के नियमों के तहत खुले समुद्र में स्क्विड, टूथफिश और अल्फोंसिनो पकड़ सकेंगे।

मुख्य बातें
- केंद्र ने दक्षिणी हिंद महासागर मत्स्य समझौते (एसआईओएफए) में भारत के शामिल होने को मंज़ूरी दी।
- भारत 2022 से इसका सहयोगी गैर-अनुबंधकारी पक्ष रहा है।
- मंत्रालय के मुताबिक भारतीय जहाज़ ज़्यादातर विशेष आर्थिक क्षेत्र के 60-80 नॉटिकल मील के भीतर मछली पकड़ते हैं।
केंद्र सरकार ने दक्षिणी हिंद महासागर मत्स्य समझौते (एसआईओएफए) में भारत के शामिल होने को मंज़ूरी दे दी है। इससे भारत इसका पूर्ण सदस्य बनेगा और भारतीय नावें दक्षिणी हिंद महासागर के खुले समुद्र में कानूनी रूप से मछली पकड़ सकेंगी।
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने बुधवार देर शाम यह फैसला घोषित किया। भारत 2022 से इस समझौते में सहयोगी गैर-अनुबंधकारी पक्ष के रूप में शामिल रहा है, जिससे उसे बातचीत में जगह तो मिली, पर फैसलों में पूरा अधिकार नहीं।
अनुबंधकारी पक्ष बनने के बाद भारतीय झंडे वाले जहाज़ और कंपनियां स्क्विड, टूथफिश, अल्फोंसिनो और ऐसी दूसरी मछलियों को अधिकृत रूप से पकड़ सकेंगी जो महासागरों के पार प्रवास नहीं करतीं। टूना का प्रबंधन अलग से हिंद महासागर टूना आयोग करता है, जिसका भारत 1996 से सदस्य है।
मंत्रालय ने कहा कि दुनिया के महासागरों का करीब 65% हिस्सा खुला समुद्र है और वहां मछली पकड़ने में चीन (21%), ताइवान (13%), जापान (11%), दक्षिण कोरिया (11%) और स्पेन (8%) का दबदबा है। इसके उलट भारतीय जहाज़ ज़्यादातर देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र के 60 से 80 नॉटिकल मील के भीतर काम करते हैं।
सदस्यता से भारत समझौते के वैज्ञानिक स्टॉक आकलन और अवैध, बिना रिपोर्ट और अनियमित मछली पकड़ने के खिलाफ काम में भी शामिल होगा। भारत एसआईओएफए की खुले समुद्र में जहाज़ों पर चढ़कर जांच करने की योजना से जुड़ सकेगा, जिसे मंत्रालय ने तटीय सुरक्षा से जोड़ा। मंत्रालय ने इसे खुले समुद्र में भारत की “मान्यता प्राप्त मौजूदगी” बताया।
असल में कितनी मछली पकड़ी जाएगी, यह इस पर निर्भर करेगा कि भारतीय जहाज़ कितने सक्षम हैं, उन्हें अनुमति मिलती है या नहीं और वे एसआईओएफए के संरक्षण नियमों पर खरे उतरते हैं या नहीं। मत्स्य पालन विभाग को अब सदस्यता की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी है।