नीतिकूटनीति
भारत ने परमाणु हथियार पहले इस्तेमाल न करने के वादे को बाध्यकारी वैश्विक समझौते में बदलने की पेशकश दोहराई
संयुक्त राष्ट्र महासभा की निरस्त्रीकरण समिति में भारत की ओर से बोलते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने यह भी कहा कि कमान प्रणालियों में एआई आने के बीच परमाणु इस्तेमाल के फैसले इंसानी नियंत्रण में रहने चाहिए।

मुख्य बातें
- भारत ने दोहराया कि वह अपने पहले इस्तेमाल न करने के वादे को बहुपक्षीय कानूनी समझौते का हिस्सा बनाने को तैयार है।
- यह बयान संयुक्त राष्ट्र की फर्स्ट कमेटी में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दिया।
- उन्होंने कहा कि परमाणु फैसले इंसानी नियंत्रण में ही रहने चाहिए।
भारत ने परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल कभी न करने के अपने वादे को एक बाध्यकारी बहुपक्षीय समझौते में बदलने की पेशकश फिर दोहराई है। यह बात संयुक्त राष्ट्र महासभा की फर्स्ट कमेटी में दिए बयान में कही गई, जो निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले देखती है।
न्यूयॉर्क में यह बयान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दिया। उन्होंने कहा कि भारत पहले इस्तेमाल न करने की अपनी प्रतिबद्धता और परमाणु हथियार न रखने वाले देशों के खिलाफ इनका इस्तेमाल न करने के वादे, दोनों को बहुपक्षीय कानूनी व्यवस्था का हिस्सा बनाने को तैयार है।
तिवारी ने भारत के परमाणु सिद्धांत के मूल आधार दोहराए: विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध, पहले इस्तेमाल नहीं, और परमाणु हथियार रहित देशों के खिलाफ इस्तेमाल नहीं। उन्होंने परमाणु परीक्षण पर भारत की स्वैच्छिक रोक और एक सहमत बहुपक्षीय ढांचे के ज़रिए सार्वभौमिक, गैर-भेदभावपूर्ण और सत्यापन योग्य परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई।
उन्होंने समिति की बहस में एक नई चिंता भी उठाई: परमाणु कमान और नियंत्रण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के फैसले इंसानी नियंत्रण में ही रहने चाहिए।
उन्होंने परमाणु खतरा कम करने के भारत के पुराने प्रस्ताव भी दोहराए, जिनमें परमाणु हथियारों को हाई अलर्ट से हटाना और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल या इस्तेमाल की धमकी पर रोक लगाने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते पर बातचीत शामिल है।
मूल दस्तावेज़
- India Reiterates Offer to Make Its Nuclear No-First-Use Commitment Part of a Multilateral Legal AgreementNews On AIR, 20 अक्टूबर 2026