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65 साल की हुई आईटीबीपी, जाते-जाते प्रमुख ने चीन सीमा के लिए ड्रोन और कमांडो पर लगाया दांव

सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने शौर्य कमांडो बटालियन, पर्वतीय लड़ाकू बल और 2027 तक पूरे बल को स्ट्राइक प्रशिक्षण की योजना बताई है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
पहाड़ों में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान (फ़ाइल फ़ोटो)
पहाड़ों में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Biswarup Ganguly / Wikimedia Commons, CC BY 3.0

मुख्य बातें

  1. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस शनिवार को अपना 65वां स्थापना दिवस मना रही है।
  2. बल के प्रमुख के मुताबिक सीमा की सभी इकाइयों में ड्रोन प्लाटून बनाई जा चुकी हैं।
  3. 2027 के अंत तक पूरे बल को स्ट्राइक प्रशिक्षण दिया जाना है।

चीन से लगी सीमा की रखवाली करने वाली भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) शनिवार को अपना 65वां स्थापना दिवस मना रही है, और उसके विदा हो रहे प्रमुख ड्रोन और कमांडो पर टिके बल की वकालत कर रहे हैं।

31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने गुरुवार को राजस्थान के अलवर में बल के अड्डे पर जवानों के सामने अपनी योजनाएं रखीं। इसी भाषण में उनकी यह टिप्पणी सुर्खियों में आई कि अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर चीनी सैनिकों से आमना-सामना जारी है।

कपूर ने माना कि चीन ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और उसकी पारंपरिक ताकत पर भारी निवेश किया है, लेकिन कहा कि ड्रोन बराबरी ला सकते हैं। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान का उदाहरण देकर बताया कि ड्रोन किस तरह युद्ध का तरीका बदल रहे हैं।

योजनाएं

उन्होंने बताया कि आईटीबीपी की सीमा की सभी इकाइयों में ड्रोन प्लाटून बनाई जा चुकी हैं, और बल ने 2020 के गलवान जैसी आमने-सामने की झड़पों के लिए जवानों को तैयार करने के वास्ते नया “स्ट्राइक” कोर्स शुरू किया है।

उन्होंने ड्रोन और ड्रोन-रोधी तकनीक पर ज़ोर, “शौर्य” कमांडो की पूरी बटालियन और सेना से अलग ऊंचाई वाले इलाकों के लिए खास पर्वतीय लड़ाकू बल की बात की। 2027 के अंत तक पूरे बल को स्ट्राइक प्रशिक्षण दिया जाना है, और अग्रिम मोर्चे पर भूमिगत ढांचे को मज़बूत किया जाएगा।

कपूर ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति बनी जिसमें अरुणाचल में कई जगहों पर आमना-सामना हुआ, और यह जारी है।” शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने इस पर कहा कि जब चीनी सेनाएं तय गश्त के तरीकों से हटती हैं तो सीमा पर हालात समय-समय पर बिगड़ते हैं।