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100 ज़िलों में लंबित मुकदमे घटाने के लिए कानून मंत्रालय ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों को जोड़ा

19 एनएलयू के छात्र और शोधकर्ता सबसे ज़्यादा बोझ वाले ज़िलों में लंबित आपराधिक मामलों का अध्ययन करेंगे और उन्हें निपटाने के तरीके सुझाएंगे।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल (बीच में) (फ़ाइल फ़ोटो)
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल (बीच में) (फ़ाइल फ़ोटो)Abhi009kk / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. देश की अदालतों में 5.8 करोड़ से ज़्यादा मामले लंबित हैं।
  2. मिशन उन 100 न्यायिक ज़िलों पर केंद्रित है जिनमें ज़िला अदालतों के आधे से ज़्यादा लंबित मामले हैं।
  3. अर्जुन राम मेघवाल के साथ बैठक में 16 राज्यों के 19 एनएलयू के कुलपति शामिल हुए।

केंद्रीय कानून मंत्रालय ने देश के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों से उन ज़िलों में लंबित आपराधिक मामलों का अंबार कम करने में मदद मांगी है, जहां अदालतों पर सबसे ज़्यादा बोझ है।

बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 16 राज्यों के 19 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (एनएलयू) के कुलपतियों से बैठक कर एक राष्ट्रव्यापी, शोध आधारित मिशन शुरू किया, जिसका निशाना सबसे ज़्यादा लंबित मामलों वाले 100 न्यायिक ज़िले हैं। देश की अदालतों में 5.8 करोड़ से ज़्यादा मामले लंबित हैं, जिनमें ज़्यादातर ज़िला और अधीनस्थ अदालतों में हैं, और इन 100 ज़िलों में ज़िला अदालतों के आधे से ज़्यादा लंबित मामले हैं।

अदालतों तक छात्र

विश्वविद्यालयों से कहा गया है कि वे अपने प्रो बोनो क्लब, शोधकर्ताओं और छात्रों के ज़रिए चुने गए ज़िलों में ज़मीनी स्तर पर लंबित मामलों का अध्ययन करें, हर ज़िले में देरी की मुख्य वजहें पहचानें और उसके हिसाब से व्यावहारिक उपाय सुझाएं।

बैठक में बेमानी हो चुके मामलों की छंटाई, मामलों की मैपिंग, वैकल्पिक विवाद समाधान, स्थगन पर नियंत्रण, प्ली बार्गेनिंग, मध्यस्थता से निपटारे और समरी ट्रायल के ज़्यादा इस्तेमाल पर चर्चा हुई। न्याय विभाग के सचिव और पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के महानिदेशक बैठक में मौजूद रहे।

मंत्रालय के मुताबिक सभी कुलपतियों ने सक्रिय भागीदारी का भरोसा दिया। मेघवाल ने इस प्रयास को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा और कहा कि देश को ऐसी न्याय व्यवस्था चाहिए जो “सुलभ, कुशल, किफ़ायती, निष्पक्ष, त्वरित और उत्तरदायी” हो।

मंत्रालय ने अभी 100 ज़िलों या शामिल विश्वविद्यालयों के नाम और कोई समय-सीमा तय नहीं की है।

मूल दस्तावेज़