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मन की बात का 139वां एपिसोड: मोदी ने कार्यक्रम को तीर्थयात्रा बताया, हेवल नदी और पूर्वोत्तर के मिलेट किसानों की तारीफ की
रविवार के प्रसारण में प्रधानमंत्री ने ई-संजीवनी के 50 करोड़ परामर्श, आईआईटी मद्रास की ब्रेन मैपिंग परियोजना और पंजाब के ऑर्गेनिक कपास बुनकरों की चर्चा की, और 31 अक्टूबर को रन फॉर यूनिटी में शामिल होने की अपील की।

मुख्य बातें
- मोदी ने कहा कि ई-संजीवनी के जरिए करीब 50 करोड़ टेली-परामर्श हो चुके हैं।
- टिहरी गढ़वाल के ग्रामीणों ने वर्षा जल संचयन और पौधारोपण से हेवल नदी को फिर जीवित किया।
- उन्होंने सरदार पटेल की जयंती, 31 अक्टूबर को रन फॉर यूनिटी में शामिल होने की अपील की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम के 139वें एपिसोड में मन की बात को “किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं” बताया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें लोगों के प्रयासों को समझने और उनका सम्मान करने का मौका मिलता है। उन्होंने याद दिलाया कि इसकी शुरुआत 12 साल पहले विजयादशमी पर हुई थी और “तब से हमारी यह यात्रा लगातार जारी है।”
प्रसारण में हमेशा की तरह स्वास्थ्य, विज्ञान, खेती और स्थानीय उद्यम की कहानियां थीं, और अंत में 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाने की अपील की गई।
स्वास्थ्य और विज्ञान
मोदी ने सरकार की ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मुझे यह देखकर बहुत संतोष होता है कि इसके जरिए अब तक करीब 50 करोड़ टेली-परामर्श हो चुके हैं।” उन्होंने बताया कि करीब 1.9 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब पंचायत स्तर पर प्राथमिक इलाज दे रहे हैं और स्थानीय वेलनेस केंद्र बनते जा रहे हैं।
उन्होंने आईआईटी मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर के बारे में विस्तार से बताया, जो परम शक्ति सुपरकंप्यूटर की मदद से हाई-रिजॉल्यूशन 3डी तस्वीरें बनाने वाला ब्रेन इमेजिंग प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा, “उनका लक्ष्य आने वाले दिनों में 100 मानव मस्तिष्कों की 3डी मैपिंग कर उनका विस्तार से अध्ययन करना है।” इसका श्रेय उन्होंने उद्योग, सरकार और संस्थान के पूर्व छात्रों को दिया।
एक नदी, कुछ खेत
मोदी ने बताया कि उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में हेवल नदी का जल स्तर घट रहा था और आसपास के प्राकृतिक जल स्रोत सूख रहे थे। जिला प्रशासन और ग्रामीणों ने वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और बड़े पैमाने पर पौधारोपण का अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि नदी फिर जीवित हो गई है और दर्जनों प्राकृतिक जल स्रोत लौट आए हैं।
उन्होंने पंजाब के मालवा क्षेत्र में खेती विरासत मिशन की नव-त्रिंजण पहल की सराहना की, जो बिना रसायन के ऑर्गेनिक और प्राकृतिक रंग वाला कपास उगाती है। इस पहल ने बुनाई का एक स्कूल भी खोला है, जिसके बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि इसने कई महिलाओं की जिंदगी बदल दी है।
मिलेट की बात उन्हें पूर्वोत्तर ले गई। मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स के खांडुली गांव में दो महिलाएं, दारापबियांग मुलिएह और दाइइदलांगकी सुचियांग, स्थानीय किसानों से रागी खरीदकर कुकीज, केक, मफिन और बच्चों का आहार बनाती हैं। मोदी ने कहा, “उन्होंने मिलेट से नए उत्पाद बनाने पर ध्यान दिया।” उन्होंने पश्चिम गारो हिल्स के सादोलपारा के किसान चेकजिंग संगमा और नगालैंड के कोहिमा जिले के केजोमा गांव का भी नाम लिया, जहां एक दशक से ज्यादा समय तक बंद रहने के बाद 2024 में समुदाय ने फिर मिलेट की खेती शुरू की।
स्थानीय सामान और 31 अक्टूबर
दिवाली और छठ से पहले मोदी ने लोगों से स्थानीय उत्पाद खरीदने को कहा। उन्होंने कहा, “‘वोकल फॉर लोकल’ की यही भावना हमारे उत्पादों को दुनिया भर के बाजारों तक ले जा रही है।” उदाहरण के तौर पर उन्होंने बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस और कर्नाटक के कलबुर्गी की दालें मालदीव पहुंचने की बात कही।
उन्होंने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी के परिवार को श्रद्धांजलि दी, जिसने सड़क हादसे में उनकी मौत के बाद अंगदान किया। उन्होंने पंजाब में जन्मे भौतिक विज्ञानी नरिंदर सिंह कपानी को भी याद किया, जिन्हें फाइबर ऑप्टिक्स का जनक कहा जाता है और जिनकी जन्मशती 31 अक्टूबर को है।
उसी दिन राष्ट्रीय एकता दिवस भी है। मोदी ने कहा, “रन फॉर यूनिटी हमारी एकता को मजबूत करने और राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है।” दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा के कई नेताओं ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रसारण सुना।