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नीतिबंदरगाह और जहाज़रानी

बंदरगाह परिषद ने 'वन नेशन वन पोर्ट' सुधारों के लिए मार्च 2027 की समयसीमा तय की

वैधानिक संस्था बनने के बाद अपनी पहली बैठक में समुद्री राज्य विकास परिषद ने तटीय राज्यों से छोटे बंदरगाहों के मास्टर प्लान बनाने और तीन महीने में नए नियम अधिसूचित करने को कहा।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित
बंदरगाह मंत्री सर्बानंद सोनोवाल (फ़ाइल फ़ोटो)
बंदरगाह मंत्री सर्बानंद सोनोवाल (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Dalton, House of Illusions / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. सर्बानंद सोनोवाल ने मुंबई में समुद्री राज्य विकास परिषद की 21वीं बैठक की अध्यक्षता की।
  2. मार्च 2027 तक सभी बंदरगाहों पर वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस सुधार और सागर सेतु से जुड़ाव होगा।
  3. राज्यों को भारतीय बंदरगाह अधिनियम के तहत नियम तीन महीने में अधिसूचित करने होंगे।

तटीय राज्यों के पास मार्च 2027 तक का समय है, जब तक हर बंदरगाह पर एक जैसी प्रक्रियाएं और दस्तावेज़ लागू करने होंगे। समुद्री राज्य विकास परिषद (एमएसडीसी) ने मंगलवार को मुंबई में यह फैसला किया।

बंदरगाह, जहाज़रानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने परिषद की 21वीं बैठक की अध्यक्षता की। भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025 के तहत मई में वैधानिक सलाहकार संस्था बनने के बाद यह परिषद की पहली बैठक थी। इसमें गुजरात के वित्त मंत्री कनुभाई देसाई, गोवा के बंदरगाह मंत्री दिगंबर कामत, महाराष्ट्र के मत्स्य और बंदरगाह मंत्री नितेश राणे और पुडुचेरी के मल्लाडी कृष्णा राव के साथ समुद्री बोर्ड, बड़े बंदरगाहों के अध्यक्ष, नौसेना और तटरक्षक बल के प्रतिनिधि शामिल हुए।

परिषद ने तय किया कि दस्तावेज़ों और प्रक्रियाओं को एक जैसा बनाने वाले वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस सुधार मार्च 2027 तक सभी बंदरगाहों पर लागू होंगे, और उसी तारीख तक हर बंदरगाह समुद्री सिंगल विंडो ‘सागर सेतु’ से जुड़ जाएगा। बंदरगाह शुल्क इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रकाशित करने होंगे।

राज्यों और उनके समुद्री बोर्डों से कहा गया कि वे छोटे (नॉन-मेजर) बंदरगाहों के मास्टर प्लान बड़े बंदरगाहों वाले मानक प्रारूप पर तैयार करें, और अधिनियम की धारा 77 के तहत अधीनस्थ नियम तीन महीने में अधिसूचित करें। परिषद ने बंदरगाह डेटा और शुल्क पारदर्शिता पर मसौदा नियमों और दिशानिर्देशों को भी मंजूरी दी।

सोनोवाल ने कहा, “भारतीय समुद्री अधिनियम ने एमएसडीसी को कानूनी आधार दिया।” उन्होंने इसे “टीम इंडिया की बैठक” बताया। उन्होंने सुधारों को लागू करने के लिए एक रेडी रेकनर जारी किया और शिपयार्डों के लिए दो ऋण बीमा उत्पाद शुरू किए: निर्यात ऑर्डरों के लिए ईसीजीसी का और घरेलू परियोजनाओं के लिए न्यू इंडिया एश्योरेंस का, जिनके प्रीमियम पर सरकार सब्सिडी देगी। उन्होंने कहा कि ये पॉलिसियां शिपयार्डों को “एक असली सुरक्षा कवच” देंगी।

बैठक से पहले प्रतिनिधियों ने मुंबई पोर्ट के क्रूज़ टर्मिनल और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण का दौरा किया।

मूल दस्तावेज़