नीतिप्रसारण
सूचना-प्रसारण मंत्रालय की टीवी चैनलों को चेतावनी: प्रोग्राम कोड मानें, एआई सिर्फ़ 'सहायक' रहे
बुधवार को निजी सैटेलाइट चैनलों को जारी एडवाइज़री में एक अंतर-विभागीय समिति को मिले उल्लंघनों का ज़िक्र है और कहा गया है कि जेनरेटिव एआई खबरों के संपादकीय मूल से दूर रहे।
मुख्य बातें
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निजी चैनलों से कहा कि वे प्रोग्राम कोड का सख्ती से पालन करें, वरना नियामकीय कार्रवाई हो सकती है।
- एडवाइज़री के मुताबिक खबरों और कार्यक्रमों में एआई का इस्तेमाल 'सहायक भूमिका तक सीमित' रहे।
- अपमानजनक या भड़काऊ टिप्पणियां रोकने के लिए चैनल आवाज़ बंद करें, चेतावनी दें या फ़ीड काट दें।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बुधवार को निजी सैटेलाइट टेलीविज़न चैनलों से प्रोग्राम कोड का सख्ती से पालन करने और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल में सावधानी बरतने को कहा। मंत्रालय ने चेताया कि उल्लंघन पर नियामकीय कार्रवाई हो सकती है।
यह एडवाइज़री एक अंतर-विभागीय समिति की समीक्षा के बाद आई है। समिति ने पाया कि कई चैनलों के प्रसारण प्रोग्राम कोड की “भावना के अनुरूप” नहीं थे। उसने यह भी देखा कि एक जैसे विषयों पर एक जैसी खबरें और दृश्य कई चैनलों पर चल रहे थे, जिससे नियमों के पालन पर सवाल उठे। मंत्रालय ने चैनलों या कार्यक्रमों के नाम नहीं बताए हैं।
एआई की सीमा
मंत्रालय ने ग्राफ़िक्स, वर्चुअल समाचार प्रस्तुतकर्ताओं और दूसरे कार्यक्रमों में जेनरेटिव एआई समेत एआई के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई। एडवाइज़री के मुताबिक इसका इस्तेमाल “सहायक भूमिका तक सीमित” रह सकता है और इससे खबरों की सटीकता, प्रामाणिकता या संवेदनशीलता से समझौता नहीं होना चाहिए। प्रसारकों से उम्मीद है कि वे संपादकीय मानक बनाए रखें और ध्यान रखें कि तकनीक तथ्यात्मक रिपोर्टिंग को न बिगाड़े।
बहस और पैनलिस्ट
एडवाइज़री स्टूडियो की बहसों पर भी बात करती है। चैनलों से कहा गया है कि वे पैनलिस्ट सोच-समझकर चुनें और उन्हें पहले से समझाएं, ताकि सांप्रदायिक, भड़काऊ या राष्ट्र-विरोधी सामग्री प्रसारित न हो, और आपत्तिजनक भाषा या आचरण को टेलीविज़न पर सामान्य न बनने दें। अगर टिप्पणियां अपमानजनक, गाली-गलौज वाली या उकसाने वाली हों, तो चैनल उनकी आवाज़ बंद करें, चेतावनी या डिस्क्लेमर दिखाएं या फ़ीड रोक दें।
प्रोग्राम कोड केबल टेलीविज़न नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और केबल टेलीविज़न नेटवर्क नियम, 1994 के तहत तय है। मंत्रालय ने कहा कि किसी भी उल्लंघन पर मौजूदा ढांचे के तहत कार्रवाई हो सकती है, लेकिन उसने जुर्माने या दंड का ब्योरा नहीं दिया।