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ग्रामीण और लोक कलाकारों को आर्थिक मदद, प्रशिक्षण और बाज़ार मिले: राष्ट्रपति मुर्मु
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के पुरस्कार देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक सहारे के बिना रचनात्मक अवसर अधूरे हैं।

मुख्य बातें
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के पुरस्कार दिए।
- उन्होंने कहा कि दूरदराज़ के कलाकारों को आर्थिक मदद, प्रशिक्षण और अनुभव की ज़रूरत है।
- संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समारोह में मौजूद रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को कहा कि देश के ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों के कलाकारों को आर्थिक मदद, प्रशिक्षण और बड़े बाज़ारों तक पहुंच मिलनी चाहिए। वे नई दिल्ली में 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के पुरस्कार दे रही थीं।
राष्ट्रपति ने कहा, “कला सिर्फ कैनवास पर खींची आकृतियों या पत्थर में तराशी मूर्तियों तक सीमित नहीं है, यह हमारी संस्कृति का दर्पण है।”
उन्होंने उन लोक और आदिवासी कलाकारों की बात की जो राष्ट्रीय दीर्घाओं तक कम ही पहुंच पाते हैं। उन्होंने कहा, “इनमें से कई कलाकार दूरदराज़ के अंदरूनी इलाकों में रहते हैं। उन्हें आर्थिक मदद, प्रशिक्षण और आज की ज़रूरतों से परिचय की ज़रूरत है।”
उनका कहना था कि केवल प्रतिभा से गुज़ारा नहीं चलता। उन्होंने कहा, “रचनात्मक अवसरों के साथ आर्थिक सहारा और बड़े बाज़ारों तक पहुंच भी होनी चाहिए।”
मुर्मु ने कलाकारों को संग्राहकों से जोड़ने वाले मंच बनाने के लिए ललित कला अकादमी और संस्कृति मंत्रालय की सराहना की, और तीसरे प्रिंट बिएनाले इंडिया में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की भी तारीफ की।
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल समारोह में मौजूद थे।