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परीक्षणों के बाद नागपुर की कंपनी ने सेना को सौंपा नागास्त्र-2 टैंक-रोधी लॉइटरिंग म्यूनिशन

सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस का कहना है कि इस ड्रोन ने अगस्त में महाजन रेंज में तकनीकी परीक्षण पूरे किए और यह 50 किलोमीटर दूर तक बख्तरबंद निशानों पर वार कर सकता है।

संपादकीय डेस्क से · नागपुरप्रकाशित
सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस का बनाया नागास्त्र लॉइटरिंग म्यूनिशन (फ़ाइल फ़ोटो)
सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस का बनाया नागास्त्र लॉइटरिंग म्यूनिशन (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: MilleniumAC / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. नागास्त्र-2 ने अगस्त में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में तकनीकी परीक्षण पूरे किए।
  2. इसमें 4 किलो का टैंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड है, जो 650 मिमी तक कवच भेद सकता है।
  3. कंपनी के मुताबिक फायर-एंड-फॉरगेट मोड में इसकी रेंज 50 किलोमीटर है और यह एक घंटे तक उड़ सकता है।

नागपुर की कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड का कहना है कि उसने अपना नागास्त्र-2 टैंक-रोधी लॉइटरिंग म्यूनिशन तकनीकी परीक्षण पूरे होने के बाद भारतीय सेना को सौंप दिया है।

परीक्षण अगस्त में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुए थे। कंपनी ने बताया कि सेना ने इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचाव समेत इसके सभी परिचालन मानकों को परखा।

लॉइटरिंग म्यूनिशन ऐसा ड्रोन होता है जो युद्धक्षेत्र के ऊपर तब तक मंडराता है जब तक उसे निशाना न मिल जाए, फिर उस पर गोता लगाकर वार करता है। कंपनी के मुताबिक नागास्त्र-2 में “दिन और रात में निगरानी करने वाले कैमरे और 4 किलो का टैंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड है”, जो टैंकों में इस्तेमाल होने वाले रोल्ड होमोजीनियस आर्मर को 650 मिमी तक भेद सकता है।

रेंज और जैमिंग

निर्माता के मुताबिक रिकवर-एंड-रीयूज़ मोड में, जिसमें निशाना न लगने पर यह लौट आता है, यह 25 किलोमीटर तक और फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 किलोमीटर तक उड़ सकता है। यह 60 मिनट तक हवा में रह सकता है।

कंपनी ने कहा, “नागास्त्र 2 की एक अहम तकनीकी खूबी इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेज़र्स (ईसीसीएम) क्षमता है।” यानी इसे संचार जैमिंग, जीपीएस जैमिंग और जीपीएस स्पूफिंग के बीच भी काम करते रहने के लिए बनाया गया है।

कंपनी ने यह नहीं बताया कि कितनी यूनिट सौंपी गईं या ऑर्डर कितने का है, और सेना ने कोई टिप्पणी नहीं की है।

यह आपूर्ति ऐसे समय हुई है जब सरकार सेनाओं पर नई तकनीक अपनाने का ज़ोर दे रही है। शुक्रवार को नई दिल्ली में सेना कमांडरों के सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कमांडरों से स्वायत्त प्रणालियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को तेज़ी से अपनाने को कहा और ड्रोन पर सेना के काम की सराहना की।