नीतिरक्षा
नौसेना में शामिल हुआ आईएनएस मंगरोल, कोच्चि में बना तीसरा उथले पानी का पनडुब्बी रोधी जहाज़
कोचीन शिपयार्ड में बने इस जहाज़ में 80% से ज़्यादा स्वदेशी सामग्री है। इसे तटीय और उथले पानी में पनडुब्बियों की तलाश के लिए बनाया गया है।

मुख्य बातें
- आईएनएस मंगरोल को 12 अक्टूबर को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में नौसेना में शामिल किया गया।
- यह कोचीन शिपयार्ड में बना तीसरा माहे श्रेणी का पनडुब्बी रोधी उथले पानी का जहाज़ है।
- नौसेना करीब ₹13,000 करोड़ के अनुबंधों के तहत ऐसे 16 जहाज़ शामिल कर रही है।
भारतीय नौसेना ने सोमवार को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आईएनएस मंगरोल को कमीशन किया। यह जहाज़ तट के पास उथले पानी में पनडुब्बियों को खोजने और उनसे मुकाबला करने के लिए बनाया गया है।
पश्चिमी नौसेना कमान के फ़्लैग ऑफ़िसर कमांडिंग-इन-चीफ़ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन ने समारोह की अध्यक्षता की। मंगरोल कोच्चि की कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में बना माहे श्रेणी का तीसरा पनडुब्बी रोधी उथले पानी का जहाज़ (एंटी-सबमरीन वॉरफ़ेयर शैलो वॉटर क्राफ़्ट) है, और नौसेना के मुताबिक इसका 80% से ज़्यादा हिस्सा भारत में बना है।
वत्सायन ने इस जहाज़ के शामिल होने को भारत के समुद्री इलाकों के आसपास के हालात से जोड़ा।
यह कमीशनिंग बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में खास महत्व रखती है।
जहाज़ में क्या है
इस जहाज़ में अभय हल-माउंटेड सोनार, हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर और मारीच एडवांस्ड टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम लगे हैं। तीन डीज़ल इंजन वॉटरजेट चलाते हैं, जिससे यह उथले पानी में भी आसानी से मुड़ सकता है, जहां बड़े युद्धपोतों को दिक्कत होती है। पनडुब्बियों की तलाश के अलावा यह पानी के भीतर निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान और बारूदी सुरंगों से जुड़े काम भी कर सकता है, और समुद्री गश्ती विमानों, हेलिकॉप्टरों और दूसरे युद्धपोतों के साथ मिलकर काम कर सकता है।
नौसेना करीब ₹13,000 करोड़ के अनुबंधों के तहत ऐसे 16 जहाज़ शामिल कर रही है। इनमें से आठ-आठ कोचीन शिपयार्ड और कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स बना रही हैं।
पुराना नाम लौटा
जहाज़ का नाम गुजरात के जूनागढ़ ज़िले के तटीय कस्बे और मछली बंदरगाह मंगरोल के नाम पर रखा गया है। यह नाम पिछली बार माइनस्वीपर आईएनएस मंगरोल (एम85) के पास था, जो अप्रैल 2004 तक सेवा में रहा।