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दिसंबर से बड़े हाईवे पुलों के डिज़ाइन की जांच करेंगे आईआईटी और बाहरी विशेषज्ञ

एनएचएआई की नई नीति बड़े नदी पुलों, वायडक्ट और 40 मीटर या उससे लंबे स्पैन वाले ढांचों पर लागू होगी, सभी नई परियोजनाओं में और उनमें भी जहां डिज़ाइन जांच अभी शुरू नहीं हुई है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
भारत के एक राजमार्ग का बड़ा पुल
भारत के एक राजमार्ग का बड़ा पुलPhoto: Arjuncm3 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0

मुख्य बातें

  1. बड़े पुलों के डिज़ाइन की जांच पैनल में शामिल आईआईटी, सरकारी संस्थान और विशेषज्ञ फ़र्म करेंगी।
  2. नियम उन नदी पुलों पर लागू होगा जिनका डिज़ाइन डिस्चार्ज 3,000 घन मीटर प्रति सेकंड या ज़्यादा है।
  3. यह 1 दिसंबर 2026 से नई ईपीसी, हैम और बीओटी परियोजनाओं पर लागू होगा।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अपने बड़े पुलों और दूसरे अहम ढांचों के डिज़ाइन को मंज़ूरी से पहले बाहरी विशेषज्ञों से जंचवाएगा। गुरुवार को इसकी नीति घोषित की गई।

डिज़ाइन की जांच पैनल में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), प्रतिष्ठित सरकारी तकनीकी संस्थान और पुल इंजीनियरिंग व हाइड्रोलिक अध्ययन में अनुभवी फ़र्म करेंगी। एनएचएआई ने कहा कि मकसद डिज़ाइन की खामियों को शुरुआत में ही पकड़ना और यह पक्का करना है कि ढांचे इंडियन रोड्स कांग्रेस के कोड, तकनीकी मानकों और अनुबंध की शर्तों पर खरे उतरें।

कौन-से ढांचे शामिल

नीति बड़े पुलों और वायडक्ट पर लागू होगी। इनमें वे नदी पुल शामिल हैं जिनका डिज़ाइन डिस्चार्ज 3,000 घन मीटर प्रति सेकंड या उससे ज़्यादा है, और ऐसा कोई भी पुल या ढांचा जिसका एक स्पैन 40 मीटर या उससे लंबा है। एनएचएआई दूसरे विशेष या जटिल ढांचों को भी इस सूची में जोड़ सकता है।

जांच में ढांचे की डिज़ाइन गणना, संरचनात्मक विश्लेषण, ड्रॉइंग और जहां लागू हो, जल-विज्ञान व हाइड्रोलिक अध्ययन शामिल होंगे। इनमें पानी का बहाव, बाढ़ का स्तर, पानी निकलने के लिए जगह पर्याप्त है या नहीं, और नदी तल के कटाव से नींव की सुरक्षा देखी जाती है।

कैसे होगी जांच

ठेकेदार या कंसेशनेयर पहले की तरह डिज़ाइन जमा करेगा। इसके बाद एनएचएआई अपने पैनल से तीन संस्थानों या फ़र्मों के नाम प्रस्तावित करेगा और उनमें से एक या ज़्यादा को स्वतंत्र जांच के लिए चुना जाएगा। उनकी टिप्पणियां ठेकेदार को भेजी जाएंगी, जिसे ज़रूरी बदलाव करने होंगे। इसके बाद एनएचएआई अनुबंध के हिसाब से डिज़ाइन की समीक्षा या मंज़ूरी करेगा।

नीति 1 दिसंबर 2026 से लागू होगी। यह सभी नई ईपीसी, हाइब्रिड एन्युटी और बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफ़र राजमार्ग परियोजनाओं पर लागू होगी, और उन परियोजनाओं पर भी जिनमें डिज़ाइन सत्यापन या प्रूफ़ चेकिंग अभी शुरू नहीं हुई है। जिन परियोजनाओं में ये जांच पूरी हो चुकी हैं, उन्हें आम तौर पर बाहर रखा जाएगा, हालांकि बड़े पुलों और जटिल ढांचों के लिए एनएचएआई अतिरिक्त जांच करवा सकता है।

मूल दस्तावेज़