नीतिकृषि
रबी एमएसपी 2027–28: गेहूं ₹25 प्रति क्विंटल बढ़ा, कुसुम और सरसों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी
गेहूं का समर्थन मूल्य ₹2,610 हो गया है, यानी 1% से भी कम बढ़ोतरी। दालों और तिलहनों को ज़्यादा बढ़ोतरी मिली है, जिसके बारे में केंद्र का कहना है कि इससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्य बातें
- आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 सितंबर 2026 को 2027–28 विपणन सीज़न के लिए छह रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंज़ूरी दी।
- गेहूं ₹25 बढ़कर ₹2,610 प्रति क्विंटल हो गया है, जबकि इसकी अनुमानित उत्पादन लागत ₹1,264 है, यानी 106% का मार्जिन।
- रुपये के हिसाब से सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी कुसुम (+₹675), रेपसीड-सरसों (+₹413) और मसूर (+₹390) में हुई है।
- सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी 2018–19 के बजट के उस वादे के मुताबिक है, जिसमें एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना तय करने की बात थी।
केंद्र ने 2027–28 के रबी विपणन सीज़न के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ₹25 बढ़ाकर ₹2,610 प्रति क्विंटल कर दिया है। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 सितंबर 2026 को छह रबी फसलों के नए एमएसपी को मंज़ूरी दी।
हमारी गणना के मुताबिक गेहूं में यह बढ़ोतरी पिछले सीज़न के ₹2,585 के मुकाबले 1% से ज़रा कम बैठती है। तिलहन और दालों को इससे कहीं ज़्यादा बढ़ोतरी मिली है।
फसल दर फसल
सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी कुसुम में हुई है, ₹675 बढ़कर ₹7,215 प्रति क्विंटल। रेपसीड और सरसों ₹413 बढ़कर ₹6,613 और मसूर ₹390 बढ़कर ₹7,390 पर पहुंच गई है। जौ ₹136 बढ़कर ₹2,286 और चना ₹83 बढ़कर ₹5,958 हो गया है।
प्रतिशत के हिसाब से, हमारी गणना के मुताबिक, कुसुम में करीब 10.3%, सरसों में 6.7%, जौ में 6.3%, मसूर में 5.6%, चने में 1.4% और गेहूं में 1.0% की बढ़ोतरी हुई है।
लागत पर मार्जिन
सरकार का कहना है कि ये एमएसपी केंद्रीय बजट 2018–19 के उस वादे के मुताबिक हैं, जिसमें एमएसपी को “अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना” तय करने की बात कही गई थी। सरकार जिस लागत को आधार बनाती है, उसमें नकद खर्च, जैसे मज़दूरी पर रखे गए श्रमिक, पट्टे की ज़मीन का किराया, खाद-बीज जैसे इनपुट, सिंचाई, मूल्यह्रास और कार्यशील पूंजी पर ब्याज, के साथ पारिवारिक श्रम का अनुमानित मूल्य भी शामिल होता है।
इस आधार पर सबसे ज़्यादा मार्जिन गेहूं पर है, ₹1,264 प्रति क्विंटल की अनुमानित लागत पर 106%। इसके बाद रेपसीड-सरसों पर 96% और मसूर पर 92% मार्जिन है। चना (59%), जौ (58%) और कुसुम (50%) 1.5 गुना की न्यूनतम सीमा के ज़्यादा करीब हैं।
रबी एमएसपी 2027–28 एक नज़र में
- ₹2,610गेहूं का एमएसपी प्रति क्विंटल, पहले ₹2,585
- 106%₹1,264 की अनुमानित लागत पर गेहूं के एमएसपी का मार्जिन
- ₹7,215₹675 की बढ़ोतरी के बाद कुसुम का एमएसपी, छह फसलों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी
- ₹90,962 करोड़रबी एमएसपी का अनुमानित वित्तीय भार
दालों और तिलहनों को ज़्यादा क्यों मिला
पीआईबी की विज्ञप्ति के मुताबिक सरकार पिछले कुछ वर्षों से अनाज के अलावा दूसरी फसलों, जैसे दालों और तिलहनों, को बढ़ावा दे रही है और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए इन्हें ज़्यादा एमएसपी दे रही है।
विज्ञप्ति में दो अवधियों की खरीद की तुलना भी की गई है। 2004–05 से 2013–14 के बीच गेहूं की खरीद 2,254 लाख टन थी, जो 2014–15 से 2025–26 के बीच बढ़कर 3,715 लाख मीट्रिक टन हो गई। इन्हीं अवधियों में गेहूं किसानों को दिया गया एमएसपी ₹2.56 लाख करोड़ से बढ़कर ₹7.31 लाख करोड़ हो गया।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि रबी एमएसपी व्यवस्था कितनी हद तक गेहूं पर टिकी है। पीआईबी के आंकड़ों से हमारी गणना के मुताबिक, 2014–15 से 2025–26 के बीच छह रबी फसलों की कुल 3,921 लाख टन खरीद में गेहूं का हिस्सा करीब 95% था।
कुल लागत कितनी
आउटलुक इंडिया ने रबी एमएसपी का अनुमानित वित्तीय भार ₹90,962 करोड़ बताया है; पीआईबी की विज्ञप्ति में कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है। आउटलुक के मुताबिक 30 सितंबर को कैबिनेट की तीन मंज़ूरियों का कुल मूल्य ₹2,79,157 करोड़ है, और एमएसपी का फैसला उनमें से एक था। बाकी दो में एक ट्रांसमिशन और स्टोरेज योजना और दिल्ली की एक ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली शामिल हैं।
नई दरें 2027–28 के रबी विपणन सीज़न की खरीद पर लागू होंगी। डीटी नेक्स्ट में छपी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में मंज़ूर 2026–27 के खरीफ एमएसपी में सामान्य धान का दाम ₹2,441 प्रति क्विंटल तय किया गया था।
मूल दस्तावेज़
- Cabinet approves Minimum Support Prices (MSP) for Rabi Crops for Marketing Season 2027-28Press Information Bureau, 30 सितंबर 2026