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टेलीकॉम सैंडबॉक्स नियम अधिसूचित, कंपनियां 24 महीने तक परख सकेंगी नई तकनीक
स्टार्टअप, कंपनियां और शोधकर्ता अब दूरसंचार अधिनियम और ट्राई अधिनियम के कुछ प्रावधानों से छूट लेकर असली उपभोक्ताओं पर नई सेवाओं का ट्रायल कर सकेंगे, लेकिन न पैसा ले सकेंगे, न उत्पाद बेच सकेंगे।

मुख्य बातें
- केंद्र ने गुरुवार को दूरसंचार (रेगुलेटरी सैंडबॉक्स) नियम, 2026 अधिसूचित किए।
- मंजूर ट्रायल 24 महीने चलेंगे, जिन्हें 12-12 महीने के लिए बढ़ाया जा सकेगा।
- उपभोक्ताओं की लिखित सहमति जरूरी होगी और ट्रायल के दौरान उनसे कोई पैसा नहीं लिया जाएगा।
केंद्र सरकार ने गुरुवार को दूरसंचार (रेगुलेटरी सैंडबॉक्स) नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए। इनके तहत स्टार्टअप, कंपनियां और शोधकर्ता नई टेलीकॉम तकनीकों, सेवाओं और बिजनेस मॉडल को व्यावसायिक रूप से उतारने से पहले असली उपभोक्ताओं पर परख सकेंगे।
सैंडबॉक्स के भीतर ट्रायल की अवधि तक प्रतिभागियों को दूरसंचार अधिनियम, 2023 और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) अधिनियम, 1997 के तय प्रावधानों से छूट मिलेगी। 6जी और उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों को नियंत्रित, असली माहौल में आजमाया जा सकेगा।
कैसे काम करेगा
स्टार्टअप, बड़ी कंपनियां, शोधकर्ता और वैज्ञानिक, सभी आवेदन कर सकेंगे। आवेदन सरकार के एक डिजिटल पोर्टल पर होगा। आवेदकों को पहले हुए लैब टेस्ट की रिपोर्ट और उन नियमों की सूची देनी होगी जिनसे वे छूट चाहते हैं। ₹10,000 की प्रोसेसिंग फीस लगेगी, जो वापस नहीं होगी।
मंजूर ट्रायल पहले 24 महीने चलेगा। इसे 12-12 महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है, बशर्ते मौजूदा अवधि खत्म होने से कम से कम 30 दिन पहले अनुरोध किया जाए।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा
प्रतिभागियों को उपभोक्ताओं को बताना होगा कि उत्पाद परखा जा रहा है और उनकी लिखित सहमति लेनी होगी। ट्रायल में शामिल किसी भी उपभोक्ता से कोई पैसा नहीं लिया जा सकेगा, और सैंडबॉक्स टेस्ट के दौरान उत्पाद व्यावसायिक रूप से बेचा नहीं जा सकेगा।
परीक्षण खत्म होने के बाद कंपनियों को अपना डेटा, कार्य योजना और उपभोक्ता सहमति के रिकॉर्ड कम से कम एक साल तक रखने होंगे।