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अशोक सेन ऑस्कर क्लाइन मेडल पाने वाले पहले भारतीय बने

बेंगलुरु के स्ट्रिंग थ्योरी विशेषज्ञ अब स्टीफन हॉकिंग, पीटर हिग्स और स्टीवन वाइनबर्ग जैसे विजेताओं की सूची में हैं। यह पदक स्टॉकहोम विश्वविद्यालय और भौतिकी की नोबेल समिति देती है।

संपादकीय डेस्क से · बेंगलुरुप्रकाशित
सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी अशोक सेन (फ़ाइल फ़ोटो)
सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी अशोक सेन (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Souravdas1998 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. अशोक सेन को 2026 का ऑस्कर क्लाइन मेडल मिला है, वे इसे पाने वाले पहले भारतीय हैं।
  2. यह पदक स्ट्रिंग थ्योरी, ब्लैक होल एन्ट्रॉपी और स्ट्रिंग फील्ड थ्योरी पर उनके काम के लिए है।
  3. इसे स्टॉकहोम विश्वविद्यालय और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की भौतिकी नोबेल समिति देती है।

दुनिया के अग्रणी स्ट्रिंग थ्योरी विशेषज्ञों में गिने जाने वाले अशोक सेन को 2026 का ऑस्कर क्लाइन मेडल दिया गया है। सैद्धांतिक भौतिकी के इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाले वे पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी हैं।

यह पदक हर साल स्टॉकहोम विश्वविद्यालय और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की भौतिकी नोबेल समिति मिलकर देती हैं। इसकी शुरुआत 1988 में हुई थी और इसका नाम स्वीडन के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी ऑस्कर क्लाइन के नाम पर है। इसके पिछले विजेताओं में स्टीफन हॉकिंग, पीटर हिग्स, चेन-निंग यांग, स्टीवन वाइनबर्ग और हांस बेथे शामिल हैं।

सेन को स्ट्रिंग थ्योरी, ब्लैक होल एन्ट्रॉपी और स्ट्रिंग फील्ड थ्योरी पर उनके काम के लिए सम्मानित किया जा रहा है। बेंगलुरु के इंटरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरेटिकल साइंसेज (आईसीटीएस) ने, जहां वे इंफोसिस-माधव चेयर प्रोफेसर हैं, गुरुवार को इस सम्मान की घोषणा की।

सम्मानों की लंबी सूची

सेन ने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज और कलकत्ता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। उनके काम को कई बड़े पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें 2012 का ब्रेकथ्रू प्राइज इन फंडामेंटल फिजिक्स, 2014 का डिराक मेडल, 2009 का इंफोसिस प्राइज (गणितीय विज्ञान) और 1994 का शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार शामिल हैं।

वे रॉयल सोसाइटी के फेलो हैं और उन्हें 2001 में पद्म श्री और 2013 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इस साल अप्रैल में उन्हें अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज का अंतरराष्ट्रीय मानद सदस्य चुना गया।

क्लाइन मेडल इस सूची में भौतिकी की नोबेल समिति से जुड़ा एक स्वीडिश सम्मान जोड़ता है, और बेंगलुरु के एक संस्थान का नाम भौतिकी के कुछ सबसे मशहूर नामों के साथ ला खड़ा करता है।

मूल दस्तावेज़