LokVox

विज्ञान-तकनीकएआई

चीन के नए एआई निर्यात पंजीकरण में सबसे पहले पास हुईं डीपसीक और मिनीमैक्स

सरकारी मीडिया के मुताबिक दोनों चीनी मॉडल निर्माताओं ने उन मसौदा नियमों के तहत फाइलिंग पूरी कर ली है, जो 23 एआई तकनीकों को बीजिंग की निर्यात नियंत्रण सूची में डालते हैं। ओपन-सोर्स रिलीज़ और एपीआई एक्सेस काफी हद तक खुले रहेंगे।

संपादकीय डेस्क से · बीजिंगप्रकाशित
डीपसीक का लोगो (फ़ाइल फ़ोटो)
डीपसीक का लोगो (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: RoadMaster19 / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. डीपसीक और मिनीमैक्स चीन का निर्यात-पूर्व पंजीकरण पूरा करने वाली पहली एआई कंपनियां हैं।
  2. बीजिंग की मसौदा सूची में बड़े मॉडल से लेकर कंप्यूटिंग क्लस्टर तक 23 एआई तकनीकें शामिल हैं।
  3. वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक एपीआई, वेबसाइट और ऐप के ज़रिये विदेश में इस्तेमाल नियंत्रण से बाहर है।

डीपसीक और मिनीमैक्स चीन के नए एआई तकनीक निर्यात पंजीकरण को पूरा करने वाली पहली चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियां बन गई हैं। एक हफ्ते पहले ही सरकार ने बड़े मॉडल, एआई एजेंट और कंप्यूटिंग क्लस्टर को नियंत्रित निर्यात की सूची में डालने का प्रस्ताव रखा था।

सरकारी प्रसारक सीसीटीवी से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट युयुआन तांतियान ने गुरुवार शाम कहा कि दोनों कंपनियों ने निर्यात-पूर्व पंजीकरण पूरा कर लिया है और अपने मॉडल को ओपन-सोर्स करने तथा विदेश में इस्तेमाल के लिए लाइसेंस देने की औपचारिकताएं भी निपटा ली हैं। किसी और एआई कंपनी ने अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसा करने की पुष्टि नहीं की है।

दोनों कंपनियों का काम भी जारी रहा। हांगझोउ की डीपसीक ने अपना V4.1 फ्लैश मॉडल अपडेट किया और अपना आंतरिक इन्फरेंस फ्रेमवर्क ओपन-सोर्स कर दिया। शंघाई की मिनीमैक्स ने शुक्रवार को अपना M3.1 मॉडल ओपन-सोर्स के रूप में जारी किया।

बीजिंग किस पर नियंत्रण कर रहा है

16 अक्टूबर को वाणिज्य मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने निर्यात के लिए प्रतिबंधित या सीमित तकनीकों की संशोधित सूची पर राय मांगी। यह सूची पहली बार 2001 में बनी थी और तब से कई बार बदली जा चुकी है। नए मसौदे में 23 एआई तकनीकें जोड़ी गई हैं, जिनमें बड़े मॉडल, एआई एजेंट, कंप्यूटिंग पावर क्लस्टर और सूचना प्रोसेसिंग के अलावा एआई चिप डिज़ाइन और हाई-स्पीड इंटरकनेक्ट भी हैं।

सूची में खास तौर पर उन बड़े मॉडलों का ज़िक्र है जो कोर या अहम डेटा पर प्रशिक्षित हैं और विदेश में सेवा के रूप में दिए जाते हैं। पैमानों में इस्तेमाल हुई कंप्यूटिंग की मात्रा, 2 ट्रिलियन से ज़्यादा पैरामीटर और क्षमता के मामले में दुनिया के शीर्ष दस में जगह शामिल है। संवेदनशील क्षेत्रों में कुछ इस्तेमाल सीमित से सीधे प्रतिबंधित श्रेणी में चले जाते हैं।

पंजीकरण का प्रावधान तुरंत लागू हो गया। कंपनियों को किसी भी दायरे में आने वाले सौदे से पहले वाणिज्य मंत्रालय में पंजीकरण कराना होगा। इनमें तकनीक का स्वामित्व हस्तांतरण, विदेश में लाइसेंसिंग या किसी विदेशी इकाई के पक्ष में नियंत्रण बदलना शामिल है।

क्या खुला रहेगा

मंत्रालय ने यह बताने पर काफी ज़ोर दिया है कि क्या नियंत्रण से बाहर है। एक प्रवक्ता ने कहा कि एपीआई, वेबसाइट और मोबाइल ऐप के ज़रिये चीनी मॉडलों तक विदेश से पहुंच इन नियंत्रणों के दायरे में नहीं है। सॉफ्टवेयर-एज़-ए-सर्विस उत्पाद और डिवाइस पर हल्की तैनाती भी बाहर है। ओपन-सोर्स रिलीज़ को तेज़ स्वचालित लाइसेंसिंग मिल सकती है, जिससे सूचना देते ही मॉडल का निर्यात संभव हो सकता है।

युयुआन तांतियान के मुताबिक मकसद सीमाएं साफ करना है, चीनी एआई तकनीक को विदेश जाने से रोकना नहीं, और नियम अंतिम होने के बाद भी ज़्यादातर एआई तकनीकें खुले तौर पर निर्यात हो सकेंगी। बीजिंग डाचेंग लॉ ऑफिसेज़ की वकील लियू होंगमेई ने कहा कि सूची लागू होने के बाद प्रतिबंधित श्रेणी की तकनीकों का निर्यात हो ही नहीं सकेगा। इसके लिए अभी कोई तारीख तय नहीं है।

भारत समेत चीन के बाहर के जो डेवलपर और कंपनियां डीपसीक या मिनीमैक्स के मॉडल एपीआई से इस्तेमाल करते हैं या उनके ओपन वेट डाउनलोड करते हैं, उनके लिए मसौदा नियम ज़्यादा कुछ नहीं बदलते। इस व्यवस्था का असली ज़ोर उन सौदों पर है जिनमें तकनीक ही सौंप दी जाती है।

दबाव का हफ्ता

ये फाइलिंग ऐसे समय हुई हैं जब कुछ ही दिन पहले, मंगलवार को, अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने संघीय नागरिक एजेंसियों को डीपसीक और उस पर आधारित टूल हटाने का आदेश दिया। बीजिंग ने इस आदेश को भेदभावपूर्ण बताया।

मसौदा सूची पर राय देने की अवधि जारी है। अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने इस साल की पहली छमाही में शोध संस्थानों, उद्योग संगठनों और प्रमुख कंपनियों से सलाह के बाद नियम तैयार करना शुरू किया था।