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पकड़ को 'महसूस' करने वाला रोबोट, एका बनी 1.45 अरब डॉलर की स्टार्टअप
एमआईटी के एक प्रोफेसर और डीपमाइंड के एक पूर्व शोधकर्ता की बनाई कंपनी एका ने ऐसे रोबोटिक हाथ के लिए 15 करोड़ डॉलर जुटाए हैं, जो चीज़ें उठाने के लिए सिर्फ कैमरे पर नहीं, बल्कि बल और स्पर्श पर भरोसा करता है।
मुख्य बातें
- एका रोबोटिक्स ने a16z और एफ-प्राइम की अगुवाई में 1.45 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर 15 करोड़ डॉलर का सीरीज़ ए दौर पूरा किया।
- इसका रोबोट एक घंटे में करीब 1,500 चीज़ें उठाता है, जबकि इंसान करीब 600।
- संस्थापकों का कहना है कि पकड़ की 'आखिरी मिलीमीटर' की समस्या दृष्टि से नहीं, बल को भांपकर हल होती है।
जो रोबोटिक्स स्टार्टअप मशीनों को यह महसूस करना सिखाती है कि उन्होंने क्या पकड़ा है, उसकी कीमत अब 1.45 अरब डॉलर आंकी गई है। एका रोबोटिक्स ने वेंचर फर्म a16z और एफ-प्राइम की अगुवाई में 15 करोड़ डॉलर (150 मिलियन डॉलर) का सीरीज़ ए दौर पूरा किया है। कंपनी का सिस्टम बल भांपने वाले ग्रिपर को एक नए तरह के डीप-लर्निंग मॉडल के साथ जोड़ता है।
एका की स्थापना मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के प्रोफेसर पुलकित अग्रवाल और गूगल डीपमाइंड के पूर्व शोधकर्ता तुओमास हार्नोया ने की है। दोनों की मुलाकात कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले में स्नातकोत्तर छात्र के रूप में हुई थी।
देखने से पहले छूना
हर तरह का काम करने वाले रोबोट बनाने की ज़्यादातर कोशिशें कैमरों पर और पहले से हरकत की योजना बनाने वाले मॉडलों पर टिकी हैं। एका के संस्थापकों का तर्क है कि असली मुश्किल आखिर में आती है, जब उंगलियां किसी चीज़ को छूती हैं। हार्नोया ने कहा, “इस क्षेत्र में ज़्यादातर ध्यान योजना बनाने पर रहा है।”
अग्रवाल ने कहा, “इस आखिरी मिलीमीटर की समस्या को हल करने का मुख्य ज़रिया दृष्टि नहीं है।” उनकी कंपनी का मॉडल ग्रिपर के ज़रिए बल को पढ़ता है और साथ-साथ खुद को ढालता है। उन्होंने कहा, “एका जिस खाई को पाट रही है, वह व्यापकता और प्रदर्शन के बीच की खाई है।” यानी कई काम कर सकने वाले रोबोट और एक काम बढ़िया करने वाले रोबोट के बीच का समझौता।
रोबोटिक्स के जाने-माने विशेषज्ञ रॉडनी ब्रूक्स भी बाहर से यही तर्क देते रहे हैं। उनकी चेतावनी है कि रोबोट के लिए जनरेटिव एआई मॉडल तब तक नाकाम रहेंगे, जब तक वे बल और स्पर्श को नहीं समझेंगे।
रोबोट क्या कर सकता है
एका का कहना है कि उसका रोबोटिक हाथ एक घंटे में एक किलो तक वज़न की करीब 1,500 चीज़ें उठा सकता है, जबकि एक इंसान करीब 600, और 95% से ज़्यादा मौकों पर यह भरोसेमंद ढंग से पकड़ बनाता है। यह हाथ इतनी तेज़ी से चलता है कि खुद को नुकसान पहुंचा सकता है।
ग्रिपर के हार्डवेयर की लागत 1,000 डॉलर से कम है और इसे 50 लाख ड्यूटी साइकिल के लिए आंका गया है। कंपनी का लक्ष्य 2 करोड़ है, जो औद्योगिक रोबोटिक हाथों का सामान्य मानक है। कंपनी अपने मॉडल को फिज़िक्स सिम्युलेटर में रीइन्फोर्समेंट लर्निंग से प्रशिक्षित करती है। एका के मुताबिक इससे कुछ ही मिनटों में रोबोट के हज़ारों घंटों का अनुभव तैयार हो जाता है।
इस दौर की सह-अगुवाई करने वाले a16z के जनरल पार्टनर रघु रागुरम ने कहा, “कुछ खास कामों में वे पहले से ही इंसान से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।”
यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय अर्बाना-शैंपेन के रोबोटिक्स विशेषज्ञ क्रिस हाउज़र ने कहा कि रोबोट “बिना दोबारा प्रशिक्षण के बड़ी संख्या में अलग-अलग चीज़ों के हिसाब से खुद को ढाल सका।”
सवाल अभी बाकी
हाउज़र ने वे सवाल भी उठाए जो कोई भी खरीदार पूछेगा: क्या यह सिस्टम असली असेंबली लाइन पर एक साल तक चल सकता है, और क्या यह चीज़ें उठाने-रखने से आगे का काम कर सकता है।
एका औद्योगिक ग्राहकों के साथ चीज़ें उठाने-रखने और तारों को संभालने के पायलट चला रही है, हालांकि उसने ग्राहकों के नाम नहीं बताए हैं।