विज्ञान-तकनीकऊर्जा
2060 तक दुनिया की परमाणु बिजली क्षमता तीन गुना से ज्यादा हो सकती है: आईएईए प्रमुख
एजेंसी की सालाना रिपोर्ट पेश करते हुए राफेल ग्रोसी ने बिजलीकरण और बिजली के भूखे एआई डेटा सेंटरों का हवाला दिया, और ईरान, उत्तर कोरिया व यूक्रेन युद्ध को लेकर चेताया।

मुख्य बातें
- आईएईए महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने कहा कि वैश्विक परमाणु क्षमता 2060 तक तीन गुना से ज्यादा हो सकती है।
- उन्होंने इस बढ़त को बिजलीकरण और भरोसेमंद, कार्बन-मुक्त बिजली चाहने वाले एआई डेटा सेंटरों से जोड़ा।
- ग्रोसी ने कहा कि ईरान के साथ कूटनीतिक समझौते की तकनीकी जमीन तैयार हो चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख ने संयुक्त राष्ट्र महासभा से कहा है कि 2060 तक दुनिया की परमाणु बिजली क्षमता तीन गुना से ज्यादा हो सकती है। बिजली की मांग बढ़ रही है और टेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए लगातार मिलने वाली, कार्बन-मुक्त बिजली खोज रही हैं।
आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने न्यूयॉर्क में महासभा के सामने एजेंसी की सालाना रिपोर्ट पेश करते हुए यह अनुमान रखा। उन्होंने इस संभावित बढ़त की वजह अर्थव्यवस्थाओं का बिजलीकरण, एआई से चलने वाले डेटा सेंटरों का फैलाव और टेक कंपनियों की ऐसी बिजली की जरूरत बताई जो भरोसेमंद भी हो और कार्बन उत्सर्जन से मुक्त भी।
ग्रोसी ने ऊर्जा सुरक्षा में परमाणु ऊर्जा की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया।
सुरक्षा की चिंताएं
उनका संबोधन सिर्फ बिजलीघरों के बारे में नहीं था। ग्रोसी ने ईरान और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों और यूक्रेन युद्ध से जुड़े परमाणु सुरक्षा खतरों पर चिंता जताई।
उन्होंने उन खबरों का भी जिक्र किया कि कुछ और देश परमाणु हथियार हासिल करने पर विचार कर रहे हैं।
ईरान पर ग्रोसी ने कहा कि कूटनीतिक समझौते के लिए जरूरी तकनीकी जमीन तैयार हो चुकी है। अब अगला कदम संबंधित सरकारों के हाथ में है।
2060 तक तीन गुना होने का अनुमान उन्हीं ताकतों पर टिका है जिनका ग्रोसी ने जिक्र किया: दुनिया के ऊर्जा इस्तेमाल का ज्यादा हिस्सा बिजली की ओर खिसकना, और एक टेक उद्योग जिसकी चौबीसों घंटे साफ बिजली की भूख हर नए एआई डेटा सेंटर के साथ बढ़ रही है।