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जुन्नर में दो मादा तेंदुओं को गर्भनिरोधक टीका, देश में अपनी तरह का पहला अध्ययन
महाराष्ट्र वन विभाग ने पुणे के पास दोनों तेंदुओं को टीका लगाकर जंगल में छोड़ा। जिस इलाके में 2000 से अब तक तेंदुओं के हमलों में 56 लोग मारे गए, वहां आबादी थामने का यह बिना जान लिए तरीका आज़माया जा रहा है।

मुख्य बातें
- जुन्नर वन प्रभाग में दो मादा तेंदुओं को इम्यूनोकॉन्ट्रासेप्टिव टीका लगाकर छोड़ा गया।
- 2000 से 2025 के बीच प्रभाग में तेंदुओं के हमलों में 56 लोगों की जान गई।
- मुंबई में आईसीएमआर हार्मोन में बदलाव पर नज़र रखने के लिए खून के नमूनों की जांच कर रहा है।
महाराष्ट्र के जुन्नर वन प्रभाग के अधिकारियों ने दो मादा तेंदुओं को गर्भनिरोधक टीका लगाकर वापस जंगल में छोड़ दिया है। विभाग के मुताबिक यह तेंदुओं को मारे या पिंजरे में बंद किए बिना उनकी संख्या संभालने के लिए इम्यूनोकॉन्ट्रासेप्शन पर देश का पहला वैज्ञानिक अध्ययन है।
वन विभाग ने एक बयान में कहा कि दोनों तेंदुओं को इम्यूनोकॉन्ट्रासेप्टिव टीका दिया गया है। विभाग इसे आबादी प्रबंधन का “बिना जान लिए अपनाया जाने वाला तरीका” बताता है।
जुन्नर ही क्यों
पुणे ज़िले के जुन्नर वन प्रभाग में इंसान और तेंदुए के टकराव का लंबा इतिहास है। 2000 से 2025 के बीच यहां तेंदुओं के हमलों में 56 लोग मारे गए। 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बना, खासकर पुणे की गन्ना उगाने वाली तहसीलों में।
अगस्त 2025 में तत्कालीन वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने विभाग से तेंदुओं की नसबंदी की कार्ययोजना तैयार करने को कहा था। इस साल अप्रैल में विभाग ने निगरानी के लिए पांच मादा तेंदुए चुने। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अध्ययन को मंज़ूरी दी।
काम कौन कर रहा है
मैदानी काम जुन्नर प्रभाग का फ्रंटलाइन स्टाफ संभाल रहा है। वन्यजीव बचाव और पुनर्वास संस्था रेस्क्यू चैरिटेबल ट्रस्ट पशु-चिकित्सा विशेषज्ञता और ज़मीनी मदद दे रही है। मुंबई में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) तेंदुओं के खून के नमूनों की जांच कर रही है, ताकि हार्मोन में बदलाव और लंबे समय के असर पर नज़र रखी जा सके।
तेंदुए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत लुप्तप्राय श्रेणी में हैं और लुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार से जुड़ी वैश्विक संधि साइटीस के परिशिष्ट I में दर्ज हैं।