विज्ञान-तकनीकपर्यावरण
जांच उपकरण नहीं: एनजीटी ने दिल्ली प्रदूषण समिति के शीर्ष अधिकारी को तलब किया
डीपीसीसी ने एनजीटी को बताया कि आदेश के मुताबिक गाज़ीपुर लैंडफ़िल के आसपास भूजल जांच के लिए उसके पास उपकरण नहीं हैं और इन्हें खरीदने के लिए टेंडर निकाला गया है।

मुख्य बातें
- एनजीटी ने डीपीसीसी के सदस्य सचिव को पेश होकर समिति की प्रयोगशाला का हाल बताने को कहा।
- डीपीसीसी ने कहा कि उसके पास भूजल जांच के उपकरण नहीं हैं और जेम पोर्टल पर टेंडर निकाला गया है।
- ट्रिब्यूनल ने गाज़ीपुर लैंडफ़िल के आसपास कम से कम 20 जगहों से नमूने लेने का आदेश दिया था।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने शुक्रवार को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के सदस्य सचिव को पेश होकर यह बताने को कहा कि क्या शहर की प्रदूषण निगरानी संस्था के पास काम करने वाली प्रयोगशाला है। समिति ने माना था कि गाज़ीपुर लैंडफ़िल के पास भूजल की जांच के लिए उसके पास उपकरण नहीं हैं।
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफ़रोज़ अहमद की पीठ पूर्वी दिल्ली के इस लैंडफ़िल में आग से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसे एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया था।
पिछले आदेश में ट्रिब्यूनल ने डीपीसीसी से लैंडफ़िल के तय दायरे में कम से कम 20 जगहों से भूजल के नमूने लेने को कहा था। बाद में यह दायरा 1.5 किलोमीटर तक बढ़ाया गया। नमूनों की जांच ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत होनी थी और नतीजों की रिपोर्ट मांगी गई थी।
शुक्रवार को डीपीसीसी के वकील ने पीठ को बताया कि समिति के पास भूजल जांच के लिए ज़रूरी उपकरण नहीं हैं। वकील ने कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल पर टेंडर निकाला गया है और उपकरण आने के बाद जांच शुरू होगी।
पीठ ने कहा कि डीपीसीसी से पूरी तरह सुसज्जित प्रयोगशाला की उम्मीद की जाती है। उसने समिति के सदस्य सचिव को अगली सुनवाई में वर्चुअल तरीके से पेश होकर प्रयोगशाला और मौजूद उपकरणों की स्थिति बताने का निर्देश दिया।
पिछली सुनवाई में डीपीसीसी की ओर से कोई पेश नहीं हुआ था और ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश की प्रति अनुपालन के लिए सदस्य सचिव को भेजी थी। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के वकील ने कहा कि उन्हें एक दिन पहले ही मामला सौंपा गया है और उन्होंने दस्तावेज़ जुटाने के लिए समय मांगा।