विज्ञान-तकनीकस्टार्टअप
डीप टेक में ₹7,131 करोड़ लगाने के लिए सरकार ने 19 फ़ंड मैनेजर चुने
₹1 लाख करोड़ के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फ़ंड का पहला समूह उन कंपनियों में पैसा लगाएगा जो लैब के शोध को उत्पाद में बदल रही हैं। डीप-टेक फ़ंडिंग लगभग तीन गुना हुई है।

मुख्य बातें
- सचिवों के समूह ने पहले मैनेजरों के रूप में 14 निवेश फ़ंड और पाँच शोध संगठन मंज़ूर किए।
- इन्हें आरडीआई फ़ंड से कुल ₹7,131 करोड़ की प्रतिबद्धता मिली है।
- जुलाई-सितंबर में डीप-टेक स्टार्टअप ने 29 करोड़ डॉलर जुटाए, जो साल भर पहले 10.5 करोड़ डॉलर था।
सरकार ने ₹1 लाख करोड़ के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) फ़ंड के तहत अपने पहले 19 फ़ंड मैनेजर चुन लिए हैं। इन्हें ₹7,131 करोड़ की प्रतिबद्धता मिली है, जो गंभीर शोध से उत्पाद बना रही भारतीय कंपनियों में लगाई जानी है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह ने इसी महीने की शुरुआत में इस समूह को मंज़ूरी दी। इसमें 14 वैकल्पिक निवेश फ़ंड और पाँच फ़ोकस्ड रिसर्च संगठन हैं, जो दूसरे स्तर के मैनेजर के रूप में कंपनियों में पैसा लगाएँगे। मंत्रालय ने अभी इनके नाम नहीं बताए हैं। समूह ने पाँच और तकनीकी क्षेत्रों को भी दायरे में लेने की मंज़ूरी दी, लेकिन उनकी सूची जारी नहीं की।
फ़ंड कैसे काम करता है
आरडीआई योजना नवंबर 2025 में शुरू हुई थी और इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत अनुसंधान नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन की एक स्वतंत्र इकाई चलाती है। यह उन कंपनियों को पैसा देती है जिनकी तकनीक टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल 4 या उससे ऊपर पहुँच चुकी है। हर फ़ंड मैनेजर से उम्मीद है कि वह आरडीआई फ़ंड से मिली रक़म के बराबर निजी पूँजी जुटाएगा। सरकार का कहना है कि वह आवेदन मँगाती रहेगी और आगे और समूह जोड़ेगी।
योजना पर सवाल भी उठे हैं। अगस्त में ख़बर आई थी कि डीप-टेक कंपनियों को आवंटित ₹2,000 करोड़ से ज़्यादा में से लगभग दो-तिहाई रक़म उन कंपनियों को गई जो चयन पैनल के सदस्यों से जुड़ी थीं।
पैसा आ रहा है
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब निवेशकों की इस क्षेत्र में दिलचस्पी बढ़ रही है। Inc42 की तिमाही फ़ंडिंग रिपोर्ट के मुताबिक़, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स, रक्षा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों के डीप-टेक स्टार्टअप ने जुलाई-सितंबर में 28 सौदों में 29 करोड़ डॉलर जुटाए, जबकि साल भर पहले 29 सौदों में 10.5 करोड़ डॉलर जुटे थे। इसमें से लगभग 13 करोड़ डॉलर अंतरिक्ष तकनीक को मिले, जिसमें पिक्सल का 10 करोड़ डॉलर का दौर सबसे आगे रहा।
भारत इनोवेशन फ़ंड के अश्विन रागुरामन ने इस बढ़त का बड़ा श्रेय आरडीआई फ़ंड और सरकार की उस व्यापक पहल को दिया, जिससे वेंचर फ़ंडों को पूँजी मिल रही है। इंडियन वेंचर एंड ऑल्टरनेट कैपिटल एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत टंडन ने सीरीज़ बी और सी स्तर पर कमी की ओर ध्यान दिलाया है, जहाँ कम ही फ़ंड इन दौरों के लिए ज़रूरी बड़ी रक़म दे पाते हैं।