खेलबॉक्सिंग
इंडियन ऑयल दो साल में भारतीय मुक्केबाजी में ₹40 करोड़ लगाएगी
राष्ट्रीय खेल विकास कोष के ज़रिये यह पैसा अकादमियों, कोचिंग, खेल विज्ञान और मुक्केबाजों को विदेशी अनुभव दिलाने पर खर्च होगा। एशियाई खेलों में भारत ने मुक्केबाजी में तीन स्वर्ण जीते थे।

मुख्य बातें
- इंडियन ऑयल ने मुक्केबाजी में दो साल में ₹40 करोड़ लगाने का समझौता किया।
- पैसा राष्ट्रीय खेल विकास कोष और भारतीय खेल प्राधिकरण के ज़रिये जाएगा।
- एशियाई खेलों में भारतीय मुक्केबाजों ने तीन स्वर्ण समेत छह पदक जीते।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन अगले दो साल में भारतीय मुक्केबाजी में ₹40 करोड़ लगाएगी। बुधवार को घोषित इस समझौते में राष्ट्रीय खेल विकास कोष (एनएसडीएफ) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) भागीदार हैं।
यह पैसा पूरी प्रक्रिया पर खर्च होगा: प्रतिभा की पहचान, ट्रेनिंग और कोचिंग, खेल विज्ञान, मुक्केबाजी अकादमियां, और विदेश में मुकाबले ताकि भारतीय मुक्केबाजों को ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिले। इसका एक हिस्सा कोचों, रेफरियों और तकनीकी अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर लगेगा।
समझौते पर केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया, खेल सचिव हरि रंजन राव, भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह और इंडियन ऑयल की मानव संसाधन निदेशक रश्मि गोविल की मौजूदगी में हस्ताक्षर हुए।
मांडविया ने कहा कि नए रूप वाली खेलो इंडिया योजना के तहत सरकार “कॉरपोरेट साझेदारों के साथ सहयोग गहरा कर रही है”, और “इस तरह की सीएसआर आधारित साझेदारियां सही मायनों में एक राष्ट्रीय खेल तंत्र बनाने में मदद करेंगी”। उन्होंने जोड़ा कि सिर्फ पैसे से मुक्केबाजी का टिकाऊ कार्यक्रम नहीं बनेगा, इसके लिए उपकरण, ट्रेनिंग केंद्र, खेल विज्ञान, प्रतिभा की खोज और कोचों व अधिकारियों के विकास में निवेश ज़रूरी है।
यह समझौता उस बदलाव के बाद आया है जिसमें सार्वजनिक उद्यम विभाग के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के साझा ढांचे में खेल को एक विषय के तौर पर जोड़ा गया। सरकार ने 1998 में राष्ट्रीय खेल विकास कोष बनाया था, जो खिलाड़ियों, बुनियादी ढांचे, कोचिंग, उपकरण और विदेशी अनुभव के लिए मदद देता है।
समय भी अनुकूल है। जापान में हुए एशियाई खेलों से भारतीय मुक्केबाज तीन स्वर्ण और तीन कांस्य समेत छह पदक लेकर लौटे। इनमें लवलीना बोरगोहेन भी हैं, जिन्होंने महिला मुक्केबाजी में स्वर्ण के लिए भारत का 12 साल का इंतज़ार खत्म किया।