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खेल महासंघों के लिए ₹7,386.74 करोड़, अंतरराष्ट्रीय आयोजन पर ₹50 करोड़ तक की मदद

राष्ट्रीय खेल महासंघों को पैसा देने वाली योजना के संशोधित दिशानिर्देश 2030-31 तक लागू रहेंगे। इनमें एक-एक खेल वाले ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्रों, राष्ट्रीय खेलों और देसी खेलों को विदेश तक ले जाने के लिए नई राशि जोड़ी गई है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
नई दिल्ली का शास्त्री भवन (फ़ाइल फ़ोटो)
नई दिल्ली का शास्त्री भवन (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Pinakpani / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता की संशोधित योजना का 2026-27 से 2030-31 तक का परिव्यय ₹7,386.74 करोड़ है।
  2. अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेज़बानी के लिए महासंघों को ₹50 करोड़ तक मिल सकते हैं, राष्ट्रीय खेलों के लिए भी यही सीमा है।
  3. मंत्रालय एक खेल पर केंद्रित ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र बनाएगा ताकि विदेश में ट्रेनिंग पर निर्भरता घटे।

युवा मामले और खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल महासंघों को पैसा देने वाली अपनी मुख्य योजना के संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं। 2026-27 से 2030-31 तक के पांच वर्षों के लिए इसका कुल परिव्यय ₹7,386.74 करोड़ है।

राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता की योजना को सरकार ने 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए मंज़ूरी दी है। महासंघों के ज़्यादातर काम, खिलाड़ियों के रहने-खाने, किट और बीमा से लेकर स्पोर्ट्स साइंस सहायता तक, इसी से चलते हैं। नए दिशानिर्देशों में इसका दायरा बढ़ाया गया है।

बड़े आयोजनों के लिए पैसा

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेज़बानी की दावेदारी करने वाले महासंघों को अब प्रति आयोजन ₹50 करोड़ तक मिल सकते हैं। राशि आयोजन के महत्व और उसमें हिस्सा लेने वाले देशों और खिलाड़ियों की संख्या पर निर्भर करेगी। प्रस्तावों का आकलन खेल सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति करेगी।

राष्ट्रीय खेलों के लिए भी ₹50 करोड़ तक की यही सीमा है। इसमें खेल उपकरण, टाइमिंग, स्कोरिंग और नतीजों की सेवाएं, तकनीकी संचालन और तकनीकी अधिकारियों का मेहनताना शामिल है।

देश में ही ट्रेनिंग

मंत्रालय ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र बनाने की योजना भी बना रहा है। हर केंद्र एक खेल पर केंद्रित होगा और उसमें स्पोर्ट्स साइंस उपकरण और विशेषज्ञ स्टाफ होगा। मकसद यह है कि शीर्ष खिलाड़ियों की विदेश में ट्रेनिंग पर निर्भरता घटे। इन केंद्रों में खिलाड़ियों को कोच और तकनीकी स्टाफ, विशेष उपकरण और स्पोर्ट्स साइंस सेवाओं के लिए मदद मिलेगी।

सीमाओं से आगे

कई नए प्रावधानों की नज़र देश से बाहर है। योजना देसी खेलों को बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन खेल का दर्जा दिलाने, विदेश में महासंघ बनाने और भारत में स्थित देसी खेलों के अंतरराष्ट्रीय महासंघों की मदद करेगी। यह ग्लोबल साउथ के साझेदार देशों के खिलाड़ियों और कोचों को छात्रवृत्ति और भारतीय सुविधाओं तक रियायती पहुंच के लिए भी पैसा देगी, साथ ही ब्रिक्स और बिम्सटेक जैसे समूहों के खेल आयोजनों, सम्मेलनों और शोध के लिए भी।

भारत में मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय और महाद्वीपीय खेल संस्थाओं को सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की सिफ़ारिश पर, महासंघों या राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के ज़रिए, हर मामले के हिसाब से धन दिया जा सकता है।