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हरियाणा: बाल देखभाल संस्थानों के सीसीटीवी अब निजी मोबाइल से नहीं जुड़ेंगे
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पाया कि कई संस्थानों के कैमरे कर्मचारियों के फोन और लैपटॉप से जुड़े थे। रिमोट एक्सेस डिफॉल्ट रूप से बंद होगा और 15 दिन में अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है।

मुख्य बातें
- बाल देखभाल संस्थान अब सीसीटीवी को निजी मोबाइल फोन या लैपटॉप से नहीं जोड़ सकेंगे।
- फुटेज की फोटो खींचने, स्क्रीन रिकॉर्ड करने या व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया पर भेजने पर रोक है।
- जिला अधिकारियों को 15 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी।
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश भर के बाल देखभाल संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपने सीसीटीवी सिस्टम को कर्मचारियों के निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप से न जोड़ें। आयोग ने पाया था कि कई संस्थानों में ठीक यही हो रहा था।
आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने गुरुवार को बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के तहत यह वैधानिक एडवाइजरी जारी की। आयोग के मुताबिक, इस तरह जुड़े कैमरों से बच्चों की लाइव फुटेज तक अनधिकृत रिमोट पहुंच का खतरा था।
संस्थानों को अब क्या करना होगा
कैमरों, रिकॉर्डिंग और पासवर्ड का नियंत्रण हर संस्थान के प्रभारी के पास रहेगा और पासवर्ड साझा करने पर रोक होगी। रिमोट एक्सेस डिफॉल्ट रूप से बंद रखा जाएगा। कर्मचारी मॉनिटर की फोटो नहीं खींच सकेंगे, स्क्रीन रिकॉर्ड नहीं कर सकेंगे और फुटेज को व्हाट्सऐप, सोशल मीडिया या किसी और माध्यम से आगे नहीं भेज सकेंगे।
किशोर न्याय मॉडल नियम, 2016 के अनुरूप शौचालयों, स्नानघरों और कपड़े बदलने की जगहों पर कैमरे लगाने पर पाबंदी है। हर संस्थान को अधिकृत उपयोगकर्ताओं का रजिस्टर भी रखना होगा, जिसमें हर बार फुटेज निकालने की तारीख, मकसद और फुटेज पाने वाले का नाम दर्ज होगा।
आयोग ने कहा कि सीसीटीवी निगरानी का एकमात्र मकसद “संस्थागत सुरक्षा और बाल संरक्षण सुनिश्चित करना होना चाहिए, बच्चों की निजता का उल्लंघन करना नहीं।”
15 दिन में जवाब
महिला एवं बाल विकास विभाग, सभी उपायुक्तों और सभी जिला बाल संरक्षण अधिकारियों से 15 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने कहा कि नियम तोड़ने वाले संस्थानों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई होगी।