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कश्मीर मैराथन में केन्याई धावकों का दबदबा, श्रीनगर में सड़कें बंद होने से जेकेसेट परीक्षा दो घंटे टली

तीसरी कश्मीर इंटरनेशनल मैराथन में करीब 2,000 धावक श्रीनगर की झील किनारे की सड़कों पर दौड़े, लेकिन ट्रैफिक पाबंदियों के चलते परीक्षार्थी केंद्रों तक नहीं पहुंच पाए और राज्य पात्रता परीक्षा देर से शुरू करनी पड़ी।

संपादकीय डेस्क से · श्रीनगरप्रकाशित
श्रीनगर में डल झील के किनारे निशात बाग (फ़ाइल फ़ोटो)
श्रीनगर में डल झील के किनारे निशात बाग (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: McKay Savage / Wikimedia Commons; Abid Sidiq Ahanger / Wikimedia Commons, CC BY 2.0, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. तीसरी कश्मीर इंटरनेशनल मैराथन में केन्याई धावकों ने फुल मैराथन के दोनों खिताब जीते।
  2. दौड़ की कुल इनामी राशि ₹3.17 करोड़ थी, ओपन वर्ग के हर विजेता को ₹25 लाख मिले।
  3. परीक्षार्थियों को केंद्र पहुंचने में दिक्कत के कारण जेकेसेट सुबह 11:30 बजे की जगह दोपहर 1:30 बजे शुरू हुई।

श्रीनगर में रविवार को हुई तीसरी कश्मीर इंटरनेशनल मैराथन में फुल मैराथन के दोनों खिताब केन्याई धावकों के नाम रहे। करीब 2,000 धावक शहर की झील किनारे की सड़कों पर उतरे। लेकिन दौड़ के लिए बंद की गई सड़कों का असर शहर में दूसरी जगह दिखा: जम्मू-कश्मीर राज्य पात्रता परीक्षा (जेकेसेट) के परीक्षार्थी समय पर केंद्रों तक नहीं पहुंच पाए और परीक्षा दो घंटे टालनी पड़ी।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सुबह 6:30 बजे 42.195 किमी की फुल मैराथन को हरी झंडी दिखाई। हाफ मैराथन सुबह 7:45 बजे शुरू हुई। पहले दो संस्करणों में खुद दौड़ चुके अब्दुल्ला इस बार नहीं दौड़े। मार्ग लाल चौक, डल झील के किनारे बुलेवार्ड और फोरशोर रोड से होकर निशात बाग तक गया।

केन्या का दबदबा

पुरुषों की फुल मैराथन इमैनुएल सिकुकू न्दिवा ने और महिलाओं की शीला जेपकोसगेई चेसांग ने जीती। ओपन वर्ग के हर विजेता को ₹3.17 करोड़ की कुल इनामी राशि में से ₹25 लाख मिले।

इस साल आयोजकों ने जम्मू-कश्मीर के धावकों के लिए अलग वर्ग भी रखा, जिसमें स्थानीय फुल मैराथन विजेता को ₹4 लाख और हाफ मैराथन विजेता को ₹2 लाख का इनाम है। खबरों के मुताबिक स्थानीय फुल मैराथन में कुलबीर सिंह और नेहा देवी विजेता रहे।

कुल 1,807 धावकों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया: 1,221 जम्मू-कश्मीर से, 513 दूसरे राज्यों से और 12 देशों के 73 खिलाड़ी। ज़्यादातर ने छोटी दौड़ चुनी: हाफ मैराथन के लिए 1,416 और फुल मैराथन के लिए 391 पंजीकरण हुए।

दौड़ से पहले केन्या के अमीन तांचेरो ने उम्मीदें संयमित रखीं। उन्होंने कहा, “आज मुझे अच्छे की उम्मीद है। मैं अपना प्रदर्शन सुधारना चाहता हूं।”

रास्ते में जुटी भीड़ को अपने नायक भी मिले। कुलसुम नाम की एक महिला गोद में बच्चा लेकर दौड़ीं, और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के शिवम कुमार, जिनके दोनों हाथ नहीं हैं, ने भी दौड़ पूरी की।

सड़कें बंद, परीक्षार्थी फंसे

दौड़ के लिए लगी ट्रैफिक पाबंदियों के कारण जेकेसेट के कई परीक्षार्थी श्रीनगर में परीक्षा केंद्रों के रास्ते में फंस गए। परीक्षा सुबह 11:30 बजे की जगह दोपहर 1:30 बजे कराई गई, ताकि देर से पहुंचे परीक्षार्थी भी बैठ सकें।

पर्यटन का प्रदर्शन

प्रशासन इस दौड़ को दुनिया के सामने कश्मीर की पहचान बनाने का ज़रिया मानता है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर धावकों की सराहना की। उन्होंने लिखा, “मैं हर उस प्रतिभागी को सलाम करता हूं जिसके संकल्प ने इस आयोजन को मानवीय जज़्बे का सच्चा उत्सव बना दिया।”

मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि मैराथन “एक प्रमुख खेल आयोजन के रूप में उभर रही है” और खेल पर्यटन के ठिकाने के रूप में क्षेत्र की जगह मज़बूत कर रही है। कश्मीर के पर्यटन निदेशक सैयद कमर सज्जाद कह चुके हैं कि यह दौड़ “पर्यटन विभाग का ब्रांड और हर साल का नियमित आयोजन बनेगी।”