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राज्यउत्तर प्रदेश

नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मेरठ कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

जिला जज ने मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या में नरमी की दलीलें ठुकरा दीं। मार्च 2025 में उनका शव सीमेंट भरे ड्रम में बंद कर दिया गया था।

संपादकीय डेस्क से · मेरठप्रकाशित
मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन
मेरठ सिटी रेलवे स्टेशनRavi Dwivedi / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने बुधवार को दोनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई।
  2. फैसला 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बयानों के बाद आया।
  3. सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी और शव गीले सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाया गया था।

मेरठ की एक अदालत ने बुधवार को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मुस्कान के पति, मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई। इस मामले ने उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया था और देशभर में यह “नीला ड्रम” हत्याकांड के नाम से चर्चित हुआ।

जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया था। 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बयानों के बाद उन्होंने सजा सुनाई। दोनों को हत्या और शव छिपाने का दोषी पाया गया। अदालत ने हत्या के आरोप में ₹50,000 और दूसरे आरोप में ₹20,000 का जुर्माना भी लगाया।

मार्च 2025 में क्या हुआ था

अभियोजन के मुताबिक 3 मार्च 2025 को मुस्कान ने पति के खाने में नशीली दवा मिलाई। इसके बाद साहिल घर पहुंचा और दोनों ने सौरभ पर चाकू से वार कर उनकी हत्या की, शव के टुकड़े किए और उन्हें नीले प्लास्टिक ड्रम में रखकर गीला सीमेंट भर दिया।

17 मार्च 2025 को मामला दर्ज हुआ और दो दिन बाद दोनों को मेरठ जेल भेज दिया गया। जुलाई 2025 में मुकदमा जिला जज की अदालत में आया और करीब 13 महीने तक बहस चली।

मामला कैसे साबित हुआ

हत्या किसी ने अपनी आंखों से नहीं देखी थी और बचाव पक्ष ने इसी पर जोर दिया। उसने यह कहकर भी रहम की गुहार लगाई कि दोनों आरोपियों की बेटियां हैं। जज ने यह दलील नहीं मानी और अभियोजन के मजबूत सबूतों का हवाला दिया।

अभियोजक विजय बहादुर ने कहा कि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिका था, जिन्हें क्रम से रखा गया और हर गवाह ने अभियोजन का साथ दिया। स्थानीय दुकानदारों ने गवाही दी कि ड्रम, सीमेंट, रेत, बड़े चाकू और उस्तरे उन्होंने ही आरोपियों को बेचे थे। कॉल रिकॉर्ड और मोबाइल टावर लोकेशन से साबित हुआ कि वारदात के वक्त साहिल घर पर था। जांचकर्ताओं ने इसके बाद शिमला और मनाली के होटलों में दोनों के ठहरने का पता भी लगाया। पोस्टमार्टम से पुष्टि हुई कि सौरभ की मौत चाकू के वार से हुई थी।

पिछले महीने दोषी ठहराते समय जज मिश्रा ने कहा था कि ऐसे कृत्य की “सभ्य समाज में कोई जगह नहीं” है। सौरभ की मां रेणु देवी ने अदालत से दोनों के लिए फांसी की मांग की थी।

आगे क्या

वकील कृष्ण कुमार दुबे ने बुधवार के फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि महिलाओं को मौत की सजा बहुत कम मिलती है। सत्र अदालत की दी हुई मौत की सजा तभी लागू हो सकती है जब हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) उसकी पुष्टि करे, और दोषी इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं।

सौरभ के परिवार के लिए यह फैसला डेढ़ साल से ज्यादा चले मामले का अंत है, और उन्हें वही सजा मिली है जिसकी मांग वे शुरू से कर रहे थे।