LokVox

राज्यमध्य प्रदेश

मोहन कैबिनेट ने ₹27,050 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर किए, जबलपुर-इंदौर कॉरिडोर के लिए बनेगी कंपनी

जबलपुर से इंदौर तक औद्योगिक हब बनाने वाली नई सरकारी कंपनी की कमान खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव संभालेंगे। सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर भुगतान को भी मंजूरी मिली।

संपादकीय डेस्क से · भोपालप्रकाशित
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (फ़ाइल फ़ोटो)
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Infofare / Wikimedia Commons, CC0

मुख्य बातें

  1. ₹100 करोड़ की शेयर पूंजी वाली सरकारी कंपनी जबलपुर-भोपाल-इंदौर औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करेगी।
  2. भावांतर भुगतान के लिए सोयाबीन किसानों को 17 अक्टूबर तक ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा।
  3. कैबिनेट ने कुल करीब ₹27,050 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर किए।

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने गुरुवार को करीब ₹27,050 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी दी और जबलपुर से भोपाल और देवास होते हुए इंदौर तक औद्योगिक कॉरिडोर बनाने के लिए एक सरकारी कंपनी के गठन का फैसला किया।

भोपाल के मंत्रालय में बैठक की अध्यक्षता करने वाले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कंपनी की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता वे खुद करेंगे। उन्होंने कहा, “तेजी से फैसले हों, इसके लिए मैं खुद कंपनी की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता करूंगा।”

कॉरिडोर के लिए कंपनी

नई कंपनी उद्योग विभाग के अधीन होगी और पूरी तरह राज्य सरकार के स्वामित्व में रहेगी। इसकी शुरुआती शेयर पूंजी ₹100 करोड़ है। यह औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक्स हब, एग्रो-प्रोसेसिंग इकाइयां, आईटी पार्क और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर के लिए जगह विकसित करेगी, साथ ही वहां काम करने वालों के लिए आवास और सामाजिक ढांचा भी बनाएगी। अपने हब के भीतर जमीन प्रबंधन और जोनिंग के अधिकार भी इसी के पास होंगे।

यादव ने कहा, “परियोजना के पहले चरण में करीब 10,000 एकड़ जमीन विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।” पहले चरण में तीन से पांच प्रमुख हब बनेंगे, जिसकी शुरुआत जबलपुर-नरसिंहपुर-रायसेन-भोपाल पट्टी से होगी।

सरकार को उम्मीद है कि पूरा विकास होने के तीन साल के भीतर कॉरिडोर में ₹3 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश आएगा और 6 लाख से ज्यादा रोजगार बनेंगे। मार्च 2028 तक ₹1 लाख करोड़ निवेश और 3 लाख रोजगार का शुरुआती लक्ष्य भी रखा गया है। योजना में हर जिले की भूमिका तय है: जबलपुर में रक्षा उत्पादन, इंजीनियरिंग और खनन, नरसिंहपुर और रायसेन में फूड प्रोसेसिंग और वेयरहाउसिंग, भोपाल में आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स, और इंदौर, देवास, उज्जैन व सीहोर के आसपास एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स।

सोयाबीन किसान और स्कूल

कैबिनेट ने इस खरीफ सीजन में सोयाबीन उत्पादकों के लिए केंद्र की पीएम-आशा योजना के तहत भावांतर भुगतान योजना को मंजूरी दी। किसानों को 17 अक्टूबर तक ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा और अधिसूचित मंडियों में 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक की बिक्री इसमें गिनी जाएगी।

स्कूलों के लिए जनजातीय कार्य विभाग के 94 सांदीपनि स्कूलों के छात्रों की बस सेवा पर ₹241.88 करोड़ मंजूर हुए। प्रति छात्र सालाना परिवहन राशि ₹10,000 से बढ़कर ₹21,000 होगी और इसमें हर साल 5% की बढ़ोतरी होगी। बस संचालन और किराया अब जिला कलेक्टर तय करेंगे। इसके अलावा सरकारी स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों और आवासीय खेल सुविधाओं के निर्माण और विस्तार पर ₹2,875.20 करोड़ खर्च होंगे।

बाकी फैसले

सबसे बड़ी राशि, ₹15,557.35 करोड़, विधि एवं विधायी कार्य विभाग की चालू योजनाओं को 16वें वित्त आयोग की अवधि, यानी अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए है। आयुष कॉलेजों और अस्पतालों को ₹3,535 करोड़ और राष्ट्रीय आयुष मिशन को ₹1,697.62 करोड़ मिले।

बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की चालू सिंचाई परियोजनाओं के लिए ₹3,076.37 करोड़ मंजूर हुए, जिनमें सिंगरौली की चितरंगी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना और रायसेन की बारना परियोजना शामिल हैं। राज्य सूचना आयोग को ₹71.81 करोड़ मिले, और नए जिलों निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में महिला एवं बाल विकास विभाग के दफ्तरों के लिए 24 नए पद बनाए गए और 12 पद दूसरी जगह से भेजे जाएंगे।