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पेपर लीक विवाद: एमपीएससी अध्यक्ष छुट्टी पर, पुणे में छात्रों का 11 दिन का आंदोलन खत्म

विवेक भीमनवार तब तक पद से दूर रहेंगे जब तक सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति जांच पूरी नहीं कर लेती। सरकार ने कहा है कि आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मामले वापस होंगे।

संपादकीय डेस्क से · पुणेप्रकाशित
एमपीएससी कार्यालय
एमपीएससी कार्यालयPhoto: Ganesh Dhamodkar / Wikimedia Commons, CC BY 2.0

मुख्य बातें

  1. एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने सोमवार तड़के करीब 1:24 बजे एक्स पर लिखा कि वे जांच पूरी होने तक छुट्टी पर रहेंगे।
  2. सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता वाली समिति पेपर लीक के आरोपों की जांच करेगी और दो महीने में सुधारों पर रिपोर्ट देगी।
  3. पुणे में एसएम जोशी पुल के पास डटे छात्रों ने आंदोलन स्थगित कर दिया, हालांकि उनकी मुख्य मांग अध्यक्ष का इस्तीफा थी।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार कथित पेपर लीक की जांच पूरी होने तक छुट्टी पर चले गए हैं, और पुणे में 11 दिन से प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है।

भीमनवार ने सोमवार तड़के करीब 1:24 बजे एक्स पर यह फैसला बताया। इससे कुछ घंटे पहले, रविवार देर रात राज्य सरकार ने जांच समिति गठित की थी। उन्होंने लिखा कि जांच चलने के दौरान पद पर बने रहने के बजाय उन्होंने हटना चुना।

एमपीएससी की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और छात्रों का हित हमेशा मेरी प्राथमिकता रहा है।

विवेक भीमनवार, एमपीएससी अध्यक्ष, एक्स पर, 12 अक्टूबर 2026

उन्होंने यह भी लिखा, “मैंने पूरे जीवन नैतिकता को प्राथमिकता दी है।”

देर रात बनी सहमति

हज़ारों अभ्यर्थी पुणे के एसएम जोशी पुल के पास डटे थे और स्वतंत्र जांच व अध्यक्ष को हटाने की मांग कर रहे थे। गतिरोध लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले, विधायक रोहित पवार और विश्वजीत कदम तथा छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल की देर रात हुई बैठक में टूटा। छात्रों को बताया गया कि सरकार ने भीमनवार को अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया है, और सोमवार सुबह तक उन्होंने आंदोलन स्थगित कर दिया।

शिवेंद्रराजे भोसले ने कहा कि आंदोलन को लेकर छात्रों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे और लीक में दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

आंदोलन की अगुवाई करने वाले एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने कहा कि छात्रों की मुख्य मांग अध्यक्ष का इस्तीफा थी, लेकिन परीक्षाओं की चिंता में उन्होंने कदम पीछे खींचा। उन्होंने कहा, “बच्चों ने एक कदम पीछे लिया, लेकिन सरकार ने दस कदम पीछे लिए।” उन्होंने यह भी कहा, “देर से ही सही, सरकार ने छात्रों की मांगें मान ली हैं।”

जांच कौन करेगा

समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले हैं। सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी.डी. नाईक, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और पुलिस अधिकारी लक्ष्मी गौतम इसके सदस्य हैं, और खाद्य एवं औषधि प्रशासन आयुक्त, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे सचिव हैं। समिति लीक के आरोपों और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच करेगी, आयोग के कामकाज की ढांचागत खामियों का अध्ययन करेगी और दो महीने में सुधारों पर रिपोर्ट सौंपेगी।

विरोध की शुरुआत उन शिकायतों से हुई कि 22 मार्च को हुई ड्रग इंस्पेक्टर स्क्रीनिंग परीक्षा का पेपर कुछ उम्मीदवारों को दो दिन पहले मिल गया था। आयोग ने उस पद की पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी। छात्रों ने तीन साल में 70,000 पद भरने और अगली ग्रुप सी परीक्षा में ज़्यादा रिक्तियों की मांग भी की है।