राज्यकर्नाटक
सिद्धारमैया के स्टिंग वीडियो फैलाने पर बेंगलुरु कोर्ट की रोक, भाजपा ने कांग्रेस को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने वीडियो को मानहानिकारक और राजनीति से प्रेरित बताया है। भाजपा का कहना है कि उनकी अपनी पार्टी ने उन्हें छोड़ दिया, जबकि एचडी कुमारस्वामी सीबीआई जांच चाहते हैं।

मुख्य बातें
- बेंगलुरु की एक सिविल कोर्ट ने मीडिया और प्लेटफॉर्म को सिद्धारमैया से जुड़े स्टिंग वीडियो फैलाने से रोका।
- उनके मुकदमे में गूगल, फेसबुक, व्हाट्सऐप और यूट्यूब समेत 42 मीडिया संस्थानों और प्लेटफॉर्म के नाम हैं।
- आर अशोक ने कहा कि कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री का "इस्तेमाल किया और फेंक दिया"।
बेंगलुरु की एक सिटी सिविल कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े विवादित स्टिंग वीडियो को मीडिया में फैलाने पर रोक लगा दी। इस बीच वीडियो को लेकर भाजपा और सत्तारूढ़ कांग्रेस के बीच खुली जंग छिड़ गई।
बताया गया है कि अदालत ने अंतरिम आदेश जारी कर समाचार संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को ये वीडियो, उनकी क्लिप, स्क्रीनशॉट या एडिट किए गए हिस्से साझा करने या दोबारा प्रसारित करने से रोका है। प्लेटफॉर्म से पहले से ऑनलाइन लिंक ब्लॉक करने को भी कहा गया है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को समन जारी कर सुनवाई टाल दी। अभी कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।
सिद्धारमैया क्या चाहते हैं
कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य सिद्धारमैया ने उन ऑडियो और वीडियो क्लिप पर रोक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिन्हें वे मानहानिकारक बताते हैं। इन क्लिप में 2011 के कथित यौन दुर्व्यवहार का आरोप है। उनके मुकदमे में आरोपों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया गया है। उन्होंने 42 मीडिया संस्थानों, जिनमें यूट्यूब चैनल, अखबार और टीवी नेटवर्क शामिल हैं, और गूगल, फेसबुक, व्हाट्सऐप और यूट्यूब के खिलाफ स्थायी रोक मांगी है।
याचिका में कहा गया है कि 2011 की एक घटना को 15 साल बाद बिना किसी आधिकारिक शिकायत, मेडिकल रिकॉर्ड या स्वतंत्र सबूत के फिर से उछाला गया है। इसमें 27 सितंबर को अपलोड किए गए एक वीडियो और “State Politics’ Biggest CD Scandal” नाम के एक कार्यक्रम का जिक्र है। सिद्धारमैया ने बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त से भी शिकायत कर निष्पक्ष जांच मांगी है।
उनके बेटे और मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने मैसूरु में कहा कि आरोप झूठे हैं और शिकायत दर्ज करा दी गई है। उन्होंने कहा, “जब झूठा प्रचार फैलाया जा रहा हो, तो क्या हम चुप रह सकते हैं?”
पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक तनवीर सैत ने कहा कि गलत करने वाले को नतीजे भुगतने चाहिए, लेकिन आरोपों की जांच होनी चाहिए, सार्वजनिक बहस नहीं। एक कन्नड़ कहावत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “जिसने नमक खाया है, उसे पानी पीना ही पड़ेगा।”
भाजपा का कांग्रेस पर हमला
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने कहा कि वे “भारी मन से” बोल रहे हैं और सिद्धारमैया की हालत के लिए उनकी अपनी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया।
अशोक ने बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा, “आज कांग्रेस ने ही सिद्धारमैया को अदालत जाने की तकलीफ दी है। यह एहसानफरामोश और धोखेबाज कांग्रेस है, जिसने उनकी पीठ में छुरा घोंपा है। उन्होंने उनका इस्तेमाल किया और फेंक दिया।”
अशोक ने स्टिंग ऑपरेशन पर तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी को इस बात की ज्यादा फिक्र है कि स्टिंग किसने करवाया। उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर आरोप लगाया कि सूखे से जूझ रहे किसानों को छोड़कर वे कर्नाटक से ज्यादा समय दिल्ली में बिताते हैं।
भाजपा के पूर्व नेता और विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने आरोप लगाया है कि सिद्धारमैया को ब्लैकमेल करके मुख्यमंत्री पद छोड़ने पर मजबूर किया गया।
जेडी(एस) के केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी एक कदम आगे गए। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की, शिवकुमार पर स्टिंग ऑपरेशन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि वे यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पास ले जाएंगे।
आगे क्या
प्रतिवादियों के समन का जवाब देने के बाद मामला फिर अदालत में आएगा। पुलिस आयुक्त के पास सिद्धारमैया की शिकायत लंबित है।