दुनियादक्षिण एशिया
रूस की ओर से लड़ने भेजने वाले गिरोह के दो लोग बांग्लादेश में गिरफ़्तार
पुलिस का कहना है कि कम से कम 30 लोगों को अच्छी तनख़्वाह वाली नौकरी का झांसा देकर रूसी सेना को सौंप दिया गया। 20 बांग्लादेशियों की मौत की पुष्टि हुई है।

मुख्य बातें
- पुलिस ने रूसी सेना से जुड़े तस्करी गिरोह के मामले में मिज़ानुर रहमान और अबू ताहिर को गिरफ़्तार किया।
- गिरोह ने नौकरी का वादा कर कम से कम 30 लोगों को रूस भेजा।
- पुलिस के मुताबिक़ क़रीब 17 लोग मोर्चे पर पहले ही दिन मारे गए।
बांग्लादेश में पुलिस ने एक तस्करी गिरोह से जुड़े होने के आरोप में दो लोगों को गिरफ़्तार किया है। यह गिरोह स्थानीय लोगों को अच्छी तनख़्वाह वाली नौकरी का झांसा देकर रूस ले जाता था और फिर यूक्रेन में लड़ने के लिए रूसी सेना को सौंप देता था।
पुलिस की विशेष इकाई स्पेशल रिस्पॉन्स बटालियन के कमांडर मोहम्मद असदुज़्ज़मान ने बुधवार को बताया कि आरोपियों, मिज़ानुर रहमान और अबू ताहिर, ने कम से कम 30 लोगों को रूस भेजने में मदद की। वहां पहुंचते ही इन लोगों के पासपोर्ट और फ़ोन ले लिए गए और उन्हें सेना के हवाले कर दिया गया।
इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ी है। पुलिस के मुताबिक़ मई की शुरुआत में रूस पहुंचे क़रीब 17 लोग मामूली प्रशिक्षण के बाद तैनाती के पहले ही दिन मारे गए। कुल 20 बांग्लादेशियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। असदुज़्ज़मान ने कहा, “बांग्लादेशियों को दुश्मन के ठिकानों का पता लगाने के लिए चारे की तरह इस्तेमाल किया गया।”
घर लौटे एक पीड़ित ने बताया है कि दो लोग मॉस्को के एक अस्पताल में हैं और छह अब भी मोर्चे पर हैं। बताया गया है कि पीड़ितों ने ऐसी नौकरियों के लिए क़रीब 8,000 डॉलर प्रति व्यक्ति चुकाए थे जो थीं ही नहीं।
बांग्लादेश उन कई देशों में से है जिनके नागरिक रूसी वर्दी में पहुंच गए हैं। अनुमान है कि 136 देशों के क़रीब 28,000 विदेशी रूस की ओर से लड़ रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि मॉस्को 47 देशों से भर्ती कर रहा है, और इस अभियान को “बेहद क्रूर” बताया था। एमनेस्टी इंटरनेशनल रूस पर विदेशियों की भर्ती में “धोखेबाज़, ज़बरदस्ती और शोषण वाले तरीक़े” अपनाने का आरोप लगाती है। रूस किसी को भी अपनी सेना में ज़बरदस्ती भर्ती करने से इनकार करता रहा है।