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अमेरिका का दावा, नाकेबंदी से रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पास पैसा खत्म; ईरान ने कहा भ्रम

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख का कहना है कि ईरान की सेना अपने सैनिकों को वेतन नहीं दे पा रही। ईरान के केंद्रीय बैंक प्रमुख के मुताबिक अर्थव्यवस्था ने 'बहुत अच्छा लचीलापन' दिखाया है।

संपादकीय डेस्क से · तेहरानप्रकाशित

मुख्य बातें

  1. सेंटकॉम प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि ईरान की सेना पर वित्तीय दबाव बहुत गहरा हो गया है।
  2. अमेरिका का कहना है कि उसने कम से कम 25 अरब डॉलर का ईरानी कच्चा तेल निर्यात रोका है।
  3. केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुलनासिर हिम्मती ने पतन की बात को भ्रम बताया।

अमेरिका का कहना है कि उसकी नौसैनिक नाकेबंदी और सैन्य हमलों ने ईरान को इतना निचोड़ दिया है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पास पैसा कम पड़ रहा है। ईरान इस दावे को खयाली पुलाव बता रहा है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि हमलों और ईरान के दक्षिणी बंदरगाहों की नाकेबंदी ने देश को “गहरी चोट” पहुंचाई है। उनके मुताबिक “ईरान की सेना पर वित्तीय दबाव इतना बढ़ गया है” कि सहयोगी मिलिशिया अपने लड़ाकों का वेतन रोककर पैसा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को भेज रहे हो सकते हैं, जो खुद अपने सैनिकों को वेतन नहीं दे पा रहा।

वॉशिंगटन का कहना है कि उसने कम से कम 25 अरब डॉलर का ईरानी कच्चा तेल निर्यात रोका है और करीब 35 करोड़ डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी फ्रीज़ कराने में मदद की है। विश्व बैंक का अनुमान है कि करीब 9 करोड़ की आबादी वाले ईरान की अर्थव्यवस्था 2026–27 में 7.7% सिकुड़ेगी।

तेहरान यह तस्वीर नहीं मानता कि देश टूटने के कगार पर है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुलनासिर हिम्मती ने कहा कि अर्थव्यवस्था ने “बहुत अच्छा लचीलापन दिखाया है” और पतन की बात “एक भ्रम से ज़्यादा कुछ नहीं” है।

राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान रविवार को ज़्यादा खुलकर बोले। उन्होंने माना कि हमलों और नाकेबंदी से “काफी बड़ी समस्याएं” पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि खपत के प्रबंधन से 12 अरब डॉलर के पेट्रोल आयात की ज़रूरत खत्म हुई और ईंधन की कीमतों से होने वाली कमाई से इलेक्ट्रॉनिक फूड वाउचर थोड़े बढ़ाने का वादा किया।

विश्लेषकों को शक है कि इस दबाव से ईरान अपना रास्ता बदलेगा। सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी की नेगार मुर्तज़वी ने कहा कि आर्थिक दबाव “ईरान के सैन्य संसाधनों को निश्चित रूप से सीमित कर रहा है”, लेकिन इससे तेहरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा। उधर अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि हिज़्बुल्लाह “ईरान से नकदी आने की झूठी कहानियों से अपनी साख बचाने की कोशिश कर रहा है”।