दुनियापूर्वी एशिया
तीसरी तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था 4.5% बढ़ी, अनुमान से थोड़ी बेहतर
जुलाई-सितंबर में निर्यात ने चीन को सहारा दिया, सितंबर में खुदरा बिक्री और औद्योगिक उत्पादन भी सुधरे। लेकिन निवेश और रियल एस्टेट अब भी सिकुड़ रहे हैं।

मुख्य बातें
- जुलाई-सितंबर में चीन की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) सालाना आधार पर 4.5% बढ़ी, दूसरी तिमाही में यह 4.3% थी।
- पहले नौ महीनों की वृद्धि 4.6% रही, जो इस साल के 4.5%-5% लक्ष्य के भीतर है।
- जनवरी-सितंबर में रियल एस्टेट निवेश 20.6% गिरा और स्थायी परिसंपत्ति निवेश 7.2% घटा।
जुलाई-सितंबर तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 4.5% बढ़ी। यह अर्थशास्त्रियों के अनुमान से थोड़ा बेहतर है। मजबूत निर्यात ने घरेलू खपत की कमजोरी और अब भी सिकुड़ते रियल एस्टेट बाजार की भरपाई की।
राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो ने सोमवार सुबह बीजिंग में ये आंकड़े जारी किए। अप्रैल-जून तिमाही में वृद्धि 4.3% थी और ज़्यादातर अनुमान 4.4% के थे। साल के पहले नौ महीनों में अर्थव्यवस्था 4.6% बढ़ी और उत्पादन करीब 107.11 लाख करोड़ युआन, यानी लगभग 15.94 लाख करोड़ डॉलर रहा।
इससे चीन 2026 के लिए तय 4.5% से 5% के लक्ष्य के भीतर बना हुआ है। यह पिछले साल के 5% के लक्ष्य से कम है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पूरे साल के लिए 4.5% वृद्धि का अनुमान लगा रहा है।
दुकानें और कारखाने
सितंबर के आंकड़ों में कुछ राहत दिखी। खुदरा बिक्री सालाना आधार पर 1.1% बढ़ी, अगस्त में यह 0.4% थी। यह मार्च के बाद की सबसे तेज़ रफ्तार है, हालांकि चीन के अपने पुराने स्तरों के हिसाब से अब भी कमजोर है। सितंबर में औद्योगिक उत्पादन 5.5% बढ़ा, जो पिछले महीने 5.2% था।
नौ महीनों में औद्योगिक मूल्य वर्धन 5.3% बढ़ा। उपकरण निर्माण 10.2% और हाई-टेक निर्माण 14.3% बढ़ा, यही वे क्षेत्र हैं जिन पर बीजिंग सबसे ज़्यादा ज़ोर दे रहा है। सेवाओं की खुदरा बिक्री 5% बढ़ी।
ब्यूरो ने कहा कि अर्थव्यवस्था “दबाव के बावजूद आगे बढ़ी और नवाचार आधारित, उच्च गुणवत्ता वाले विकास की ओर बढ़ती रही।” ब्यूरो के उप प्रमुख माओ शेंगयोंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंकड़े पेश किए।
नौ महीनों में शहरी बेरोज़गारी दर औसतन 5.2% रही, जो पिछले साल के बराबर है। सितंबर में यह 5.2% थी, अगस्त से 0.1 प्रतिशत अंक कम।
कमजोर कड़ियां
मुख्य आंकड़े के नीचे निर्माण और निवेश की मंदी जारी है। जनवरी-सितंबर में स्थायी परिसंपत्ति निवेश 7.2% गिरा और रियल एस्टेट निवेश 20.6% घटा। आईएमएफ ने बीजिंग से मांग बढ़ाने के लिए परिवारों और स्थानीय सरकारों को ज़्यादा पैसा देने को कहा है।
ज़्यादातर काम निर्यात ने किया। गर्मियों भर चीनी सामान विदेश जाता रहा और व्यापार अधिशेष बढ़ा। इससे वृद्धि को मदद मिली, लेकिन व्यापारिक साझेदारों के साथ तनाव भी बढ़ता है।
भारत के लिए मायने
चीन भारत के आयात का सबसे बड़ा स्रोत है। अगर चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात पर टिकी रहे और घरेलू मांग कमजोर रहे, तो स्टील, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर उपकरणों में भारतीय निर्माताओं के लिए देश के भीतर और तीसरे बाज़ारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
आगे क्या
इन आंकड़ों से एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए व्यस्त हफ्ते की शुरुआत हुई है। चीन इस हफ्ते अपनी बेंचमार्क ऋण दरें तय करेगा, बैंक ऑफ कोरिया गुरुवार को ब्याज दरों पर फैसला करेगा और जापान महंगाई के आंकड़े जारी करेगा।