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ताइवान से रिश्तों पर चीन ने पराग्वे और बेलीज़ के मंत्रियों पर लगाए प्रतिबंध
बीजिंग ने दोनों मंत्रियों की चीन में संपत्ति ज़ब्त करने और प्रवेश पर रोक का ऐलान किया और उन्हें ताइपे का मोहरा बताया। ताइवान ने इसे बेतुका कहा, और उसकी सेना तट पर चीन के हफ़्ते भर चलने वाले लाइव-फ़ायर अभ्यास पर नज़र रखे है।

मुख्य बातें
- चीन ने बेलीज़ के विदेश मंत्री फ़्रांसिस फ़ोन्सेका और पराग्वे के आईसीटी मंत्री गुस्तावो विय्याते पर प्रतिबंध लगाए।
- इनमें संपत्ति ज़ब्ती, प्रवेश पर रोक और चीनी संस्थाओं के उनसे लेन-देन पर पाबंदी शामिल है।
- ताइवान का रक्षा मंत्रालय इस हफ़्ते पांच तटीय इलाकों में चीन के लाइव-फ़ायर अभ्यास पर नज़र रखे है।
चीन ने सोमवार को ताइवान को मान्यता देने वाले दो देशों के मौजूदा मंत्रियों पर प्रतिबंध लगा दिए। बीजिंग ने उन पर ताइवान सरकार का “मोहरा” बनने का आरोप लगाया और दूसरे देशों को भी इससे सबक लेने की चेतावनी दी।
निशाने पर बेलीज़ के विदेश मंत्री फ़्रांसिस फ़ोन्सेका और पराग्वे के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्री गुस्तावो विय्याते हैं। बीजिंग ने कहा कि चीन में उनकी जो भी संपत्ति है वह ज़ब्त की जाएगी, हांगकांग और मकाऊ समेत उन्हें वीज़ा नहीं दिया जाएगा, और चीनी संस्थाओं व लोगों को उनके साथ लेन-देन से रोका जाएगा।
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में ब्रीफ़िंग में कहा कि ये कदम “उन्हें दंडित करने और दूसरों के लिए चेतावनी” के तौर पर हैं। उन्होंने कहा, “पराग्वे और बेलीज़ के कुछ नेता अपनी मर्ज़ी से ताइवान प्रशासन के मोहरे बने।” उन्होंने दोनों पर “ताइवान की आज़ादी के अलगाववादियों” से मिलने और “चीनी साइबर हमलों के बारे में दुष्प्रचार” फैलाने का आरोप लगाया।
यही दो क्यों
दोनों मंत्री खुलकर ताइपे के करीब रहे हैं। फ़ोन्सेका पिछले महीने बेलीज़ में ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग से मिले थे। विय्याते जून में पराग्वे में ताइवान के उप विदेश मंत्री चेन मिंग-ची से मिले थे। जुलाई में पराग्वे और असुनसियोन स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा था कि चीनी सरकार से जुड़े हैकरों ने पराग्वे के सरकारी सिस्टम में सेंध लगाई, जिसे बीजिंग ने खारिज किया था।
विय्याते ने कहा कि ताइवान के साथ डेटा सेंटर समेत साझा परियोजनाओं को देखते हुए ये प्रतिबंध “अपेक्षित” थे। उन्होंने कहा, “हम बिल्कुल शांत हैं। हम अपनी सभी परियोजनाओं पर काम जारी रखेंगे और इसे और ज़ोर से आगे बढ़ाएंगे।” बेलीज़ के विदेश मंत्रालय ने फ़ौरन कोई जवाब नहीं दिया।
ये कदम मोटे तौर पर प्रतीकात्मक हैं, क्योंकि ताइवान के सहयोगी देशों के मंत्री शायद ही चीन जाते हैं। पराग्वे और बेलीज़ उन सिर्फ़ 12 देशों में हैं जिनके ताइपे से औपचारिक राजनयिक संबंध बचे हैं।
ताइपे का पलटवार
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने चीन के बयान को “पूरी तरह बेतुका” और प्रतिबंधों को “दूसरे देशों की संप्रभुता और विदेश नीति में खुला दखल” बताया। उसने कहा कि चीन को “ताइवान के राजनयिक संबंधों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं” है और ताइवान अपने सभी सहयोगियों के साथ काम करता रहेगा।
यह कदम राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के राष्ट्रीय दिवस भाषण के दो दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ताइवान शांति को महत्व देता है लेकिन अपनी आज़ादी नहीं छोड़ेगा। ताइवान को अपना इलाका बताने वाले बीजिंग ने भाषण की निंदा की थी।
तट पर अभ्यास
ताइवान चीन के हफ़्ते भर चलने वाले लाइव-फ़ायर अभ्यास पर भी नज़र रखे है। चीन के मैरीटाइम सेफ़्टी एडमिनिस्ट्रेशन ने दक्षिण चीन सागर से लेकर उत्तर-पूर्व के लियाओनिंग प्रांत तक पांच इलाकों के लिए जहाज़ों की आवाजाही पर रोक के नोटिस जारी किए हैं। इनमें से कोई भी इलाका ताइवान के आसपास नहीं है; सबसे नज़दीकी झेजियांग प्रांत के पास है।
रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ने सोमवार को सांसदों को बताया कि सेना का शुरुआती आकलन है कि तटीय तोपखाना इकाइयां फ़ायरिंग अभ्यास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ताइवान “फ़ायरिंग हो या सैन्य प्रशिक्षण”, दोनों पर नज़र रखेगा और “दुश्मन का यथासंभव व्यापक अनुमान लगाने” के सिद्धांत पर चलता है।