दुनियापश्चिम एशिया
बिना घोषणा इज़राइल पहुंचे हेगसेथ, नेतन्याहू से मिले; क़तर बोला, ईरान-अमेरिका बातचीत जारी
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने दक्षिणी रेगिस्तान के एक एयर बेस पर इज़राइली प्रधानमंत्री से मुलाकात की। चुनाव में एक हफ्ता बचा है, ट्रंप ने नेतन्याहू का समर्थन किया है और वेंस दूर रहे हैं।

मुख्य बातें
- पीट हेगसेथ ने सोमवार को इज़राइल के दक्षिणी रेगिस्तान में एक वायुसेना अड्डे पर बिन्यामिन नेतन्याहू से मुलाकात की।
- क़तर ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है, भले ही फिर से लड़ाई का डर है।
- नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल को नए गठबंधन बनाने होंगे, और "भारत कोई छोटा देश नहीं है"।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोमवार को इज़राइल के एक ऐसे दौरे में प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से मुलाकात की, जिसकी किसी भी सरकार ने घोषणा नहीं की थी। पूरा इलाका यह देख रहा है कि ईरान के साथ जंग फिर भड़कती है या नहीं।
इज़राइल के आर्मी रेडियो के मुताबिक दोनों की मुलाकात देश के दक्षिणी रेगिस्तान में एक वायुसेना अड्डे पर हुई। मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने सबसे पहले इस बैठक की बात बताई। पेंटागन ने टिप्पणी से इनकार किया और किसी पक्ष ने नहीं बताया कि क्या बात हुई। हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर बस इतना कहा कि वे सेंट्रल कमांड के इलाके में तैनात अमेरिकी सैनिकों से मिलने गए थे। यह कमान पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों को देखती है।
यह दौरा ऐसे समय हुआ जब क़तर ने मंगलवार को कहा कि बढ़ते तनाव और नई लड़ाई की आशंका के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही है। क़तर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने यह नहीं बताया कि बातचीत कहां तक पहुंची है।
चुनाव में एक हफ्ता
हेगसेथ का दौरा इज़राइली चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में हुआ है। 27 अक्टूबर को मतदान है। 7 अक्टूबर 2023 के हमास के नेतृत्व वाले हमलों और उसके बाद गाज़ा युद्ध के बाद यह पहला आम चुनाव है। सर्वे बताते हैं कि नेतन्याहू का धार्मिक-राष्ट्रवादी गठबंधन बहुमत खो सकता है, हालांकि विपक्ष के लिए भी सरकार बनाना आसान नहीं दिखता।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को नेतन्याहू को “पूरा और संपूर्ण समर्थन” दिया और ईरान के खिलाफ अमेरिकी जंग में उन्हें साथी बताया। ट्रंप ने लिखा, “बीबी नेतन्याहू आपको कभी निराश नहीं करेंगे!”
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दूरी बनाए रखी। उन्होंने कहा, “मैं इज़राइली चुनावों में दखल नहीं दे रहा। मैं अमेरिकी उम्मीदवारों का समर्थन करता हूं, और मेरा ध्यान मध्यावधि चुनावों पर है।”
वॉशिंगटन से आगे की सोच
ट्रंप के समर्थन से कुछ घंटे पहले नेतन्याहू ने यरुशलम में एक सुरक्षा नीति पेश की, जिसमें खुद अमेरिका को लेकर चेतावनी भी थी। उन्होंने कहा, “दो साल में कोई ऐसा राष्ट्रपति, पुरुष या महिला, सत्ता में आ सकता है जो इज़राइल के प्रति बहुत शत्रुतापूर्ण हो।”
उनका जवाब था कि बचे हुए समय का पूरा इस्तेमाल किया जाए और दोस्ती का दायरा बढ़ाया जाए। नेतन्याहू ने कहा, “दूसरी बात है अन्य गठबंधन बनाना। भारत कोई छोटा देश नहीं है, और ऐसे कई और देश हैं।” लैटिन अमेरिका की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “लैटिन अमेरिका में बड़ा बदलाव हो रहा है, और कुछ ही दिनों में ब्राज़ील में भारी बदलाव हो सकता है।”
नेतन्याहू अक्सर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने रिश्तों का हवाला देकर कहते हैं कि इज़राइल अलग-थलग नहीं है। मई में उन्होंने भारत के साथ “अनोखे रिश्ते” की बात कही थी।
उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी, पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़नकोट ने इस नीति को “नारों से भरे दो खोखले पन्ने” और “खाली राजनीतिक कवायद” बताया।
आगे क्या
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर खोलने की तेहरान की सात दिन की योजना “अब भी मेज़ पर है”। वहीं ट्रंप कहते हैं कि अमेरिका ईरान पर “आर्थिक और सैन्य रूप से” चोट करता रहेगा। न वॉशिंगटन ने और न यरुशलम ने बताया है कि हेगसेथ के दौरे में जंग के अगले चरण पर बात हुई या नहीं।