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रूसी हमलों से इस सर्दी लाखों यूक्रेनियों पर बेघर होने का खतरा, यूएन एजेंसी की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के मुताबिक घर लौटे 15.6 लाख लोग अब मोर्चे वाले जिलों में रहते हैं, और वहां पिछली सर्दी सिर्फ 1% लोग ही घर ठीक से गर्म रख पाए।
मुख्य बातें
- आईओएम के मुताबिक करीब 15.6 लाख लौटे लोग मोर्चे वाले जिलों में रहते हैं।
- पिछली सर्दी सिर्फ 32% यूक्रेनी अपने घर ठीक से गर्म रख पाए, मोर्चे के पास यह आंकड़ा 1% रहा।
- हर 10 में से छह परिवारों ने हीटिंग में कटौती की है।
संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन के घरों और बिजली आपूर्ति पर रूस के हमलों के चलते इस सर्दी लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं। जंग से भागकर लौटे बहुत से लोग गर्म और सुरक्षित रहने के लिए जूझ रहे हैं।
शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने कहा कि जून 2026 तक घर लौटे करीब 15.6 लाख यूक्रेनी अब मोर्चे वाले जिलों में रहते हैं। इन इलाकों में हर चार में से तीन लोगों को टूटी दीवारों की मरम्मत के लिए सामान चाहिए, और करीब हर चार में से दो को इंसुलेशन और छत के सामान की जरूरत है।
आईओएम के यूरोप और मध्य एशिया के क्षेत्रीय निदेशक आर्थर एर्केन ने कहा, “लाखों यूक्रेनियों के लिए चुनौती अब सिर्फ यह नहीं रह गई है कि वे घर लौट सकते हैं या नहीं।” उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि लोगों के लिए अपने घरों में सुरक्षित रह पाना मुश्किल हो रहा है।
ठंडे घर
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले हीटिंग सीजन में सिर्फ 32% यूक्रेनी अपने घर ठीक से गर्म रख पाए। मोर्चे वाले इलाकों में यह आंकड़ा 1% था। हर 10 में से छह परिवारों ने हीटिंग कम कर दी है।
कुल मिलाकर करीब 41 लाख लोग यूक्रेन लौट चुके हैं। इस आंकड़े में देश के भीतर विस्थापित लोग शामिल नहीं हैं।
निशाने पर ग्रिड
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब सर्दी से पहले रूस यूक्रेन की ऊर्जा व्यवस्था पर हमले तेज कर रहा है। प्रधानमंत्री सेर्ही कोरेत्स्की के मुताबिक 13 और 14 अक्टूबर के हमले में कीव के तीनों संयुक्त ताप और बिजली संयंत्रों पर हमला हुआ, साथ ही कीव क्षेत्र के उस ढांचे पर भी जो राजधानी और मध्य यूक्रेन को बिजली देता है। कीव पुलिस के मुताबिक एक रिहायशी इमारत पर हमले में कम से कम तीन महिलाएं मारी गईं।
शनिवार तड़के तक रूसी ड्रोन और मिसाइलें एक बार फिर पश्चिमी और मध्य यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमला कर रही थीं।