दुनियाबांग्लादेश
बंगाल की खाड़ी वाली विकास योजना में भारत की वापसी चाहता है जापान, तारिक़ रहमान टोक्यो दौरे पर
ढाका के अधिकारियों के मुताबिक अगले हफ्ते के शिखर सम्मेलन में टोक्यो बिग-बी पहल में भारत को फिर शामिल करने का मुद्दा उठाएगा। दोनों देश रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने वाले हैं।

मुख्य बातें
- तारिक़ रहमान के 26-29 अक्टूबर के दौरे में जापान बिग-बी में भारत की वापसी पर ज़ोर दे सकता है।
- बांग्लादेश और जापान रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने वाले हैं।
- फरवरी 2024 तक जापान पूर्वोत्तर भारत को करीब 385 अरब येन की विकास सहायता दे चुका था।
ढाका के अधिकारियों के मुताबिक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान जब अगले हफ्ते टोक्यो जाएंगे, तो जापान अपनी ‘बे ऑफ बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ बेल्ट’ में भारत को फिर से शामिल करने पर ज़ोर दे सकता है। यह संकेत है कि ढाका और नई दिल्ली के बीच दो साल के तनाव के बाद टोक्यो को इलाके के लिए अपनी योजनाएं फिर से जोड़ने का मौका दिख रहा है।
बिग-बी नाम की यह पहल जापान ने 2014 में बंगाल की खाड़ी के आसपास उद्योग और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए शुरू की थी, जिसकी शुरुआत ढाका-चट्टोग्राम-कॉक्स बाज़ार गलियारे से हुई। यह तीन स्तंभों, उद्योग और व्यापार, ऊर्जा और परिवहन, पर टिकी है और जापान के पैसे से बन रहे मातारबाड़ी गहरे पानी के बंदरगाह जैसी परियोजनाओं के इर्द-गिर्द बुनी गई है। 2023 में जापान ने बांग्लादेश को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से और करीब जोड़ने के लिए एक बड़ी ‘बे ऑफ बंगाल-नॉर्थईस्ट इंडिया इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन इनिशिएटिव’ का प्रस्ताव रखा था।
5 अगस्त 2024 को शेख़ हसीना की अवामी लीग सरकार गिरने के बाद यह योजना ठिठक गई, क्योंकि बांग्लादेश और भारत के रिश्तों में खटास आ गई।
बांग्लादेश के एक अधिकारी ने कहा, “जापान ने पूर्वोत्तर भारत में भारी निवेश किया है। भारत भी बांग्लादेश के साथ सीमा पार कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम कर रहा है ताकि उसके पूर्वोत्तर राज्यों और मुख्य भूमि के बीच माल की आवाजाही आसान हो। दोनों देशों की दिलचस्पी बंगाल की खाड़ी तक जाने वाली कनेक्टिविटी में है।” उन्होंने कहा, “अब जब राजनीतिक हालात बदल गए हैं, जापान इलाके के लिए अपना रणनीतिक नज़रिया फिर ज़िंदा करना चाहता है। सर्वोच्च स्तर की आगामी बातचीत में बिग-बी शामिल रहेगा।”
टोक्यो के लिए भारत क्यों अहम
भारत में जापान के दूतावास के मुताबिक फरवरी 2024 तक जापान पूर्वोत्तर भारत को करीब 385 अरब येन की विकास सहायता दे चुका था, जिसका बड़ा हिस्सा सड़कों और कनेक्टिविटी पर गया। अधिकारियों के मुताबिक ढाका और टोक्यो ने हालात अनुकूल होने पर भारत के जुड़ने का रास्ता खुला रखा है।
नई दिल्ली के लिए पूर्वोत्तर से बांग्लादेश होकर बंगाल की खाड़ी के किसी गहरे बंदरगाह तक कारगर रास्ता संकरे सिलीगुड़ी गलियारे के लंबे चक्कर को छोटा कर देगा। यही वजह है कि बांग्लादेशी बंदरगाहों में भारत की दिलचस्पी बरसों से बनी हुई है।
बड़ी साझेदारी की ओर
तारिक़ रहमान प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के न्योते पर 26 से 29 अक्टूबर तक जापान में रहेंगे। तैयारियों से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि दोनों पक्ष रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दे सकते हैं। जापान का यह दर्जा फिलहाल आसियान, फ़िलीपींस, वियतनाम और लाओस के साथ है। जापान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि यह दौरा रिश्तों को मज़बूत करेगा और ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफ़िक’ के नए नज़रिये पर तालमेल बढ़ाएगा।
मातारबाड़ी की क्षेत्रीय भूमिका पर ढाका अपनी राय सधे ढंग से रख रहा है। बंदरगाह को उप-क्षेत्रीय केंद्र बनाने के जापान के विचार पर पूछे जाने पर विदेश सचिव असद आलम सियाम ने कहा कि बांग्लादेश के बंदरगाहों को पहले देश की अपनी ज़रूरतें पूरी करनी हैं। उन्होंने कहा, “अगर हमारी मांग पूरी करने के बाद बंदरगाह और संभाल सकता है, तो हम इस पर सोचेंगे।”
अभी साफ नहीं है कि विदेश मंत्री ख़लीलुर रहमान प्रधानमंत्री के साथ जाएंगे या नहीं। सियाम ने कहा, “अगर उनका कार्यक्रम मेल खाता है, तो वह साथ जाएंगे।”