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मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिकी जज ने नौ राज्यों में गैर-नागरिक मतदाताओं की डीएचएस जांच पर लगाम लगाई

जज अरासेली मार्टिनेज-ओल्गुइन ने माना कि यह अभियान नागरिकों को डराता है और गलत आंकड़ों पर टिका है। अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा कि वोट सिर्फ पात्र लोग डालें। अपील के लिए आदेश शुक्रवार तक रुका है।

संपादकीय डेस्क से · वॉशिंगटनप्रकाशित
अमेरिकी जिला जज अरासेली मार्टिनेज-ओल्गुइन और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिकी जिला जज अरासेली मार्टिनेज-ओल्गुइन और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: U.S. Senate Judiciary Committee / Wikimedia Commons; Ryan M. Biller / Wikimedia Commons, Public domain

मुख्य बातें

  1. आदेश कैलिफोर्निया, जॉर्जिया, पेंसिल्वेनिया और विस्कॉन्सिन समेत नौ राज्यों पर लागू है।
  2. डीएचएस ने 4.82 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड से निशाने की सूचियां बनाईं।
  3. रोक न मिली तो फैसला शुक्रवार शाम 5 बजे से लागू होगा।

अमेरिका की एक संघीय जज ने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) को आदेश दिया है कि नौ राज्यों में गैर-नागरिक मतदाताओं को खोजने के अभियान में वह उन लोगों के खिलाफ फील्ड कार्रवाई बंद करे जिनके अमेरिकी नागरिक होने का उसे अंदेशा है। यह आदेश मध्यावधि चुनावों से दो हफ्ते से भी कम पहले आया है।

अमेरिकी जिला जज अरासेली मार्टिनेज-ओल्गुइन ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की यह दलील कामयाब हो सकती है कि यह अभियान वोटिंग राइट्स एक्ट का उल्लंघन करता है, जो मतदाताओं की मदद करने या उन्हें जुटाने वालों को डराने पर रोक लगाता है। आदेश कैलिफोर्निया, कनेक्टिकट, जॉर्जिया, मिसूरी, नेवाडा, न्यूयॉर्क, पेंसिल्वेनिया, वॉशिंगटन और विस्कॉन्सिन पर लागू है।

आदेश के तहत डीएचएस सिर्फ अपने वोटर-मैचिंग कार्यक्रम के रिकॉर्ड के भरोसे उन लोगों को निशाना नहीं बना सकता, जिनके बारे में वह जानता है, शक करता है या जिन पर उसे वाजिब तौर पर शक होना चाहिए कि वे नागरिक हैं। प्रशासन को अपील का समय देने के लिए आदेश शुक्रवार शाम 5 बजे तक रोका गया है।

विभाग ने करोड़ों मतदाता रिकॉर्ड से निशाने की सूचियां बनाईं, जिनमें 4.82 करोड़ मतदाताओं वाली वे सूचियां भी हैं जिन्हें जज ने “संदिग्ध स्रोत” वाली बताया। कर्मचारियों से कम से कम 40 समीक्षाएं पूरी करने को कहा गया था और व्यावसायिक डेटाबेस से किसी व्यक्ति को क्लियर करने के लिए उनके पास 12 मिनट से ज्यादा नहीं थे।

जज ने लिखा कि विभाग के आंकड़ों के बारे में “सब जानते हैं कि उनमें अनजाने में अमेरिकी नागरिक भी शामिल हैं”, जिससे नागरिकों को डर है कि “जांच के लिए चिह्नित लाखों लोगों में उनका नाम गलत तरीके से शामिल हो जाएगा”। उन्होंने कहा कि यह डर “वस्तुनिष्ठ रूप से वाजिब” है।

मुकदमा नेशनल नर्सेज यूनाइटेड और कैलिफोर्निया नर्सेज एसोसिएशन, वोटो लातिनो फाउंडेशन, सांता क्लारा काउंटी और सैन फ्रांसिस्को सिटी एंड काउंटी ने दायर किया था। उनके वकील, प्रोटेक्ट डेमोक्रेसी के बो ट्रेमिटियर ने कहा कि वोट देना ऐसा अधिकार है जिसका इस्तेमाल नागरिक “हथियारबंद सरकारी एजेंटों के उत्पीड़न के बिना कर पाने चाहिए”।

डीएचएस के एक प्रवक्ता ने कहा कि विभाग का उन मतदाताओं की जांच का कोई इरादा नहीं है जिन्हें वह नागरिक मानता है, और वह “वोट डालकर अमेरिकी नागरिकों के वोट का वजन घटाने वाले विदेशियों की पहचान करने, उन पर मुकदमा चलाने और उन्हें निकालने पर पूरी तरह केंद्रित है”। अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा कि मकसद “अमेरिकी जनता को यह गारंटी देना है कि वोट सिर्फ वही लोग डालें जो इसके पात्र हैं”। अधिकारियों ने अभी नहीं बताया है कि वे अपील करेंगे या नहीं।