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केन्या में इबोला के मामले बढ़कर सात हुए, तीन स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित

नए मरीज़ों में वे स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं जिन्होंने देश के पहले मरीज़ का इलाज किया था। केन्या के भीतर संक्रमण फैलने के ये पहले ज्ञात मामले हैं; मंत्रालय का कहना है कि समुदाय में फैलाव के संकेत नहीं हैं।

संपादकीय डेस्क से · नैरोबीप्रकाशित
नैरोबी का जोमो केन्याटा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (फ़ाइल फ़ोटो)
नैरोबी का जोमो केन्याटा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Fawaz.tairou / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. केन्या ने शनिवार को इबोला के चार नए मामलों की पुष्टि की, कुल संख्या सात हो गई।
  2. इनमें तीन स्वास्थ्यकर्मी हैं जिन्होंने 3 और 4 अक्टूबर को पहले मरीज़ की देखभाल की थी।
  3. बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई मंज़ूर टीका या इलाज नहीं है।

केन्या में इबोला के चार और मामलों की पुष्टि हुई है, जिससे देश में कुल मामले सात हो गए हैं। पहली बार वायरस केन्या के भीतर एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंचा है। नए मरीज़ों में तीन स्वास्थ्यकर्मी हैं जिन्होंने देश के पहले मरीज़ का इलाज किया था।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि 29, 35 और 32 साल के ये तीनों, दो पुरुष और एक महिला, 3 और 4 अक्टूबर को पहले मरीज़ की देखभाल में लगे थे और 9 अक्टूबर से क्वारंटीन में थे। चौथा नया मरीज़ उसी मरीज़ का एक पुरुष रिश्तेदार है, जो 6 अक्टूबर से क्वारंटीन में था। चारों को आइसोलेशन में रखकर इलाज किया जा रहा है। दूसरे और तीसरे मरीज़ की हालत स्थिर है।

मंत्रालय ने कहा, “आम जनता के लिए जोखिम कम बना हुआ है क्योंकि सामुदायिक संक्रमण का कोई सबूत नहीं है।” उसने कहा कि यात्रा, व्यापार या सार्वजनिक आयोजनों पर कोई रोक नहीं है।

नैरोबी तक कैसे पहुंचा

पहला मरीज़, 40 साल का एक केन्याई व्यक्ति, करीब एक महीने से कांगो में बीमार था। वह सड़क के रास्ते युगांडा गया, 3 अक्टूबर को विमान से नैरोबी पहुंचा और दो दिन बाद उसकी मौत हो गई।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने उसके 130 संपर्कों की सूची बनाई है। इनमें से 128 क्वारंटीन में हैं और दो की तलाश जारी है। केन्या ने युगांडा सीमा पर बुसिया क्रॉसिंग समेत कई जगह जांच कड़ी की है और एक आपात हेल्पलाइन शुरू की है।

ये मामले कांगो की महामारी से जुड़े हैं, जो अब तक का दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप है, जिसमें 9,000 से ज़्यादा मामले और 4,000 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं। केन्या के मरीज़ों में बुंडीबुग्यो स्ट्रेन मिला है, जिसके लिए कोई मंज़ूर टीका या इलाज नहीं है। इबोला संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों या दूषित बिस्तर और कपड़ों के सीधे संपर्क से फैलता है।