LokVox

दुनियायूरोप

दंगों पर मैक्रों बोले, 'गुस्सा और शर्म'; फ्रांस में एक दिन में करीब 2,400 गिरफ्तार, 1,000 पुलिसकर्मी घायल

रविवार को एलिसी पैलेस में संकट बैठक के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि लूटपाट करने वालों को अपने अपराधों की कीमत चुकानी होगी। उन्होंने पीड़ितों के लिए संकट प्रकोष्ठ बनाया, लेकिन आपातकाल नहीं लगाया।

संपादकीय डेस्क से · पेरिसप्रकाशित
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (फ़ाइल फ़ोटो)
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Заеднички изјави за медиуми пред работната вечера во Париз со претседателот на Франција Емануел Макрон / Wikimedia Commons, CC0

मुख्य बातें

  1. गृह मंत्रालय के मुताबिक अकेले शनिवार को करीब 2,400 लोग गिरफ्तार हुए।
  2. प्रदर्शनों के लूटपाट और आगज़नी में बदलने से करीब 1,000 पुलिसकर्मी और जेंडार्म घायल हुए।
  3. मैक्रों ने पीड़ितों के लिए संकट प्रकोष्ठ की घोषणा की, पर न आपातकाल, न कर्फ्यू लगाया।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को कहा कि वह “गणतंत्र को गिराने” की कोशिशों से “गुस्से और शर्म” से भरे हैं। इससे एक दिन पहले देश में लूटपाट, आगज़नी और सड़कों पर झड़पें हुईं, जिन्हें बरसों की सबसे बुरी शहरी हिंसा माना जा रहा है।

एलिसी पैलेस में अंतर-मंत्रालयी संकट बैठक की अध्यक्षता के बाद टेलीविज़न पर बोलते हुए मैक्रों ने वादा किया कि दंगाइयों और लुटेरों को “अपने अपराधों की कीमत चुकानी होगी”। गृह मंत्रालय ने बताया कि शनिवार को करीब 2,400 लोग गिरफ्तार हुए और करीब 1,000 पुलिसकर्मी और जेंडार्म घायल हुए।

मैक्रों ने “जायज़ मांगें” रखने वालों और तोड़फोड़ व लूट करने वालों के बीच फर्क किया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को “कई शहरों में अभूतपूर्व हिंसा” का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “हमें एकता चाहिए, शांति और सम्मान चाहिए।”

उन्होंने नुकसान झेलने वालों तक तुरंत मदद पहुंचाने के लिए एक संकट प्रकोष्ठ की घोषणा की और सरकार से पूरी घटना से सबक की समीक्षा करने को कहा। उन्होंने सड़कों पर सुरक्षा बढ़ाने का वादा किया, लेकिन आपातकाल या कर्फ्यू की घोषणा नहीं की।

नुकसान का सप्ताहांत

फ्रांस के तीन सबसे बड़े शहरों में रविवार को सफाई चलती रही। पेरिस में लेस हाल्स शॉपिंग सेंटर, पेरिस ओपेरा के आसपास और कई बड़े ब्रांडों की दुकानों के शीशे तोड़े गए। लियोन में दमकलकर्मियों ने शहर के पर्यटन कार्यालय में लगी आग बुझाई, जिसका अगला हिस्सा झुलस गया, और पास की दुकानों में तोड़फोड़ और लूट हुई। सफाई में युवाओं ने भी हाथ बंटाया। मार्सेई में रू सेंट-फेरियोल की सफाई की गई और शहर प्रशासन ने प्रभावित कारोबारियों के लिए सूचना केंद्र खोला।

आंदोलन की शुरुआत छात्र संगठनों ने की थी, जो स्कूलों के लिए कम पैसे, जर्जर इमारतों और शिक्षकों की कमी से नाराज़ हैं। बाद में जिले जोन (पीली जैकेट) आंदोलन भी कटौती, बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों के विरोध के साथ इसमें शामिल हो गया।

अव्यवस्था की राजनीति

अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव से पहले यह अशांति तेज़ी से चुनावी मुद्दा बन रही है, और मैक्रों के दोनों तरफ के विरोधियों ने तुरंत मोर्चा खोल दिया।

वामपंथी राष्ट्रपति उम्मीदवार ज़ां-लुक मेलांशों ने कहा कि तबाही के लिए सरकार “अकेले ज़िम्मेदार” है, क्योंकि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रही। धुर दक्षिणपंथी नेता जॉर्डन बार्देला ने राष्ट्रपति के भाषण को “दयनीय” और “कायरतापूर्ण” बताया और कहा कि सरकार नागरिकों की रक्षा नहीं कर सकती।

फ्रांस अकेला नहीं है। हाल के दिनों में इटली और बेल्जियम में भी महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हुए हैं, और अल्बानिया में छात्र करीब एक हफ्ते से तिराना की सड़कों पर हैं।

रविवार का संबोधन सड़कों को शांत कर पाएगा या नहीं, यह तय नहीं है। मैक्रों ने छात्रों और पीली जैकेट आंदोलन को नई रियायतों के बजाय सुरक्षा और राहत की पेशकश की, और सख्त पुलिसिंग के उनके वादे की परीक्षा अभी बाकी है।