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लंदन में भारतीय उच्चायोग पर 2023 के प्रदर्शन मामले में ब्रिटिश नागरिक पर यूएपीए के तहत आरोप तय
दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत ने कहा कि इंद्रपाल सिंह गाबा के गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने का पुख्ता संदेह है, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप हटा दिया। उनके वकील अपील करेंगे।

मुख्य बातें
- दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत ने इंद्रपाल सिंह गाबा पर यूएपीए की धारा 13(1) के तहत आरोप तय किया।
- बचाव पक्ष की इस दलील के बाद कि कानून विदेश में लागू नहीं होता, अदालत ने उन्हें राष्ट्रीय सम्मान कानून के आरोप से मुक्त किया।
- मामला 19 मार्च 2023 के प्रदर्शन का है, जब लंदन में उच्चायोग पर भारतीय झंडा उतारा गया था।
दिल्ली की एक विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने मार्च 2023 में लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग पर हुए खालिस्तान समर्थक प्रदर्शन के मामले में इंद्रपाल सिंह गाबा पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप तय किया है।
विशेष न्यायाधीश विकास धुल ने 8 अक्टूबर के आदेश में गाबा पर अधिनियम की धारा 13(1) के तहत आरोप तय किया, जो गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने से जुड़ी है। अदालत ने कहा, “इस बात का पुख्ता संदेह है कि आरोपी ने गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने का अपराध किया है।”
न्यायाधीश ने उन्हें राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 के आरोप से मुक्त कर दिया।
लंदन में क्या हुआ था
अभियोजन के मुताबिक, रविवार 19 मार्च 2023 को दोपहर करीब 1:45 बजे पीले खालिस्तानी झंडे लिए 50 से 60 प्रदर्शनकारी उच्चायोग के बाहर जमा हुए। उन पर आरोप है कि वे बालकनी पर चढ़े, भारतीय झंडा उतारकर खालिस्तानी झंडा लगाया, अधिकारियों पर हमला किया और इमारत को नुकसान पहुंचाया।
मामला पहले भारतीय दंड संहिता, यूएपीए और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर नंबर 80/23 के रूप में दर्ज हुआ था, जिसे बाद में एनआईए ने फिर से दर्ज किया।
बचाव पक्ष करेगा अपील
गाबा के वकील अरुण खत्री ने अदालत में कहा कि आरोपपत्र से उनके खिलाफ मामला नहीं बनता, 19 मार्च को वे मौके पर नहीं थे और मूल एफआईआर में उनका नाम नहीं था। उन्होंने दलील दी कि 1971 के झंडा कानून में विदेश में हुए कृत्यों पर लागू होने का कोई प्रावधान नहीं है, और रिकॉर्ड पर किसी साज़िश की सामग्री नहीं है। बचाव पक्ष ने गाबा को ब्रिटिश नागरिक बताया।
खत्री ने कहा, “हम इसे हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।” एनआईए की ओर से अधिवक्ता अनिल डबास पेश हुए।