दुनियादक्षिण एशिया
पाकिस्तान ने ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में आपातकाल लगाया, इमरान ख़ान की पार्टी की सरकार हटी
पुलिस ने सोमवार को पुष्टि की कि हटाए गए मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी और विधानसभा अध्यक्ष एहतियाती हिरासत में हैं। इमरान ख़ान की रिहाई के लिए पीटीआई का लॉन्ग मार्च स्वाबी में ही ठंडा पड़ गया।

मुख्य बातें
- राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कैबिनेट की सलाह पर रविवार को ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लगा दिया।
- सरकार ने कहा कि प्रांत आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई से पीछे हट गया था; पीटीआई ने इस कदम को अलोकतांत्रिक बताया।
- पुलिस के मुताबिक, हटाए गए मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी समेत आठ लोग एहतियाती हिरासत में हैं।
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रविवार को ख़ैबर पख़्तूनख़्वा की कमान सीधे अपने हाथ में ले ली। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी की प्रांतीय सरकार को ऐसे वक्त हटाया गया, जब उनके समर्थक उनकी रिहाई की मांग को लेकर मार्च कर रहे थे।
राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की कैबिनेट की सिफ़ारिश मंज़ूर करते हुए संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत इस उत्तर-पश्चिमी प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लगा दिया। मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी, उनके मंत्री, सलाहकार और प्रांत के महाधिवक्ता तुरंत प्रभाव से पद से हट गए। प्रांतीय विधानसभा भंग नहीं की गई, लेकिन उसके कानून बनाने के अधिकार संघीय संसद को चले गए।
उद्घोषणा में कहा गया कि मौजूदा हालात में प्रांतीय सरकार “संविधान के अनुसार काम नहीं कर सकती”, और इसके लिए नागरिकों, सरकारी इमारतों और सुरक्षा बलों पर आतंकी हमलों का हवाला दिया गया। आपात बैठक में शरीफ़ की कैबिनेट ने प्रांत पर “आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई से जानबूझकर दूरी बनाने” का आरोप लगाया।
इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) का ज़िक्र करते हुए शरीफ़ ने कैबिनेट से कहा, “मैं उन्हें अर्थव्यवस्था को अस्थिर नहीं करने दूंगा।”
बीच में रुका मार्च
जब यह आदेश आया, तब अफ़रीदी पीटीआई के लॉन्ग मार्च की अगुवाई कर रहे थे। सोमवार को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि आठ लोगों को “एहतियाती हिरासत” में लिया गया है। इनमें अफ़रीदी, पीटीआई के प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर और प्रांतीय विधानसभा के अध्यक्ष बाबर सलीम स्वाती शामिल हैं। गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि इन लोगों को रविवार को हिरासत में लिया गया था, और जिन पर मुकदमे हैं उन पर कार्रवाई होगी, बाकी लोगों को छोड़ दिया जाएगा।
मार्च भी बेदम हो गया। काफ़िले के रविवार रात स्वाबी पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन सोमवार को वहां कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ। पुलिस ने शिवा अड्डा और इस्माइला इंटरचेंज पर जुटे कार्यकर्ताओं को तितर-बितर कर दिया, और पूरे ज़िले में मोबाइल नेटवर्क और पीटीसीएल इंटरनेट बंद कर दिए गए। पुलिस ने स्वाबी में पीटीआई के 59 कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया। पेशावर के आसपास शिपिंग कंटेनरों से सड़कें बंद कर दी गईं, प्रांत के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट काट दिया गया, पेशावर की बस रैपिड ट्रांज़िट सेवा रोक दी गई और सोमवार को पेशावर ज़िले के स्कूल बंद रहे। संघीय सरकार ने नागरिक प्रशासन की मदद के लिए सेना की तैनाती को मंज़ूरी दे दी है।
पीटीआई का पलटवार
पीटीआई अध्यक्ष गौहर अली ख़ान ने इस कदम को अलोकतांत्रिक बताया और कहा कि पार्टी इसे अदालतों, विधानसभाओं और जनता के बीच चुनौती देगी। उन्होंने पूरे प्रांत में गवर्नर शासन पर सवाल उठाया: “अगर आतंकवाद की समस्या 12 ज़िलों में है, तो पूरे प्रांत में गवर्नर शासन क्यों लगाया गया?”
इमरान ख़ान के करीबी ज़ुल्फ़िकार बुख़ारी ने इसे “बेतुका फ़ैसला” बताया और चेताया कि इससे “और ख़ून-ख़राबा, अस्थिरता और नुकसान” होगा। पीटीआई के महासचिव सलमान अकरम राजा ने संयम की अपील की: “हम पत्थर नहीं फेंकेंगे। शांतिपूर्ण विरोध के ज़रिए हमें अपना नैतिक पक्ष रखना है।”
सोमवार तक अदालत में कोई याचिका दाखिल नहीं हुई थी, हालांकि कोई भी चुनौती पहले पेशावर हाईकोर्ट में जाने की संभावना है। पाकिस्तान बार काउंसिल के आठ सदस्यों ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताया। उन्होंने एक संयुक्त बयान में कहा कि “प्रांतीय सरकार और प्रांतीय विधानसभा, दोनों अपना काम कर रही थीं”।
अब प्रांत कौन चलाएगा
ज़रदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता, गवर्नर फ़ैसल करीम कुंडी के पास अब संघीय निर्देशों के तहत कार्यकारी अधिकार हैं। उनकी मदद के लिए 11 सदस्यों की सलाहकार परिषद बनाई गई है, और मुहम्मद फ़ख़्र आलम इरफ़ान को मुख्य सचिव बनाया गया है। बन्नू, बाजौर, कुर्रम और उत्तरी वज़ीरिस्तान समेत 12 ज़िलों में प्रशासन, सुरक्षा और विकास का काम एक अलग सचिवालय देखेगा।
संविधान के तहत गवर्नर शासन को संसद की संयुक्त बैठक के सामने रखना होता है। इसे बढ़ाया न जाए तो यह दो महीने बाद खत्म हो जाता है, और ज़्यादा से ज़्यादा छह महीने तक चल सकता है।
यहां तक कैसे पहुंचे
इमरान ख़ान को अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए प्रधानमंत्री पद से हटाया गया था और वह अगस्त 2023 से जेल में हैं। उनकी पार्टी ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में सत्ता में रही है और चरमपंथियों से निपटने के तरीके और अफ़ग़ान तालिबान से बातचीत के सवाल पर केंद्र से उसका टकराव रहा है। सरकार और पीटीआई के बीच बातचीत 3 अक्टूबर को टूट गई थी।
अपडेट 12 अक्टूबर 2026, दोपहर 3:00 बजे: यह खबर पहली बार प्रकाशित होने के बाद अपडेट की गई।