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पेशावर हादसा: एफआईआर में स्कूल मालिकों और ठेकेदार के नाम, कुंडी ने कमज़ोर किए गए कानून को कोसा

मामले में घटिया निर्माण सामग्री और दरकती दीवारों की अनदेखी का आरोप है। खैबर पख्तूनख्वा की हर स्कूल इमारत की तीन दिन में जांच होगी।

संपादकीय डेस्क से · पेशावरप्रकाशित
खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)
खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Osamayawar1988 / Wikimedia Commons, CC0

मुख्य बातें

  1. एफआईआर में स्कूल के मालिकों, हिस्सेदारों और ठेकेदार के नाम हैं और घटिया सामग्री का आरोप है।
  2. खैबर पख्तूनख्वा के हर ज़िले की समितियों को हर स्कूल इमारत पर तीन दिन में रिपोर्ट देनी है।
  3. गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने कानून से स्कूल सील करने का अधिकार हटाने को "आपराधिक कृत्य" कहा।

पेशावर पुलिस ने उस निजी स्कूल के मालिकों, हिस्सेदारों और ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है जिसकी छत गुरुवार को गिर गई थी। आरोप है कि इमारत घटिया सामग्री से बनी थी और उसकी जर्जर दीवारों को लेकर मिली चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया गया।

शुक्रवार को आगा मीर जानी शाह थाने में पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 148, 149 और 322 के तहत दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि छात्रों ने पहले भी स्कूल प्रशासन से दीवारों और छतों की हालत की शिकायत की थी। स्कूल के मालिक को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने कहा कि मामले में नामज़द बाकी लोगों को पकड़ने की कोशिश जारी है।

शुक्रवार को अधिकारियों के बताए मृतकों के आंकड़े 33 से 35 के बीच रहे। इनमें लगभग सभी डिर कॉलोनी के अल-खैर स्कूल के बच्चे थे। 50 से ज़्यादा लोगों का अब भी इलाज चल रहा था।

इमारत कैसे ढही

एफआईआर के मुताबिक दूसरी मंज़िल पर नर्सरी कक्षा की छत और भूतल के कमरों की छतें गिरीं। तीन मंज़िला इमारत लोहे के गर्डरों और बिना सरिए वाली ईंट की चिनाई से बनी थी और उसमें पर्याप्त ढांचागत सहारा नहीं था। सुबह की कक्षाओं के दौरान पहली मंज़िल की एक कक्षा का ढांचा टूटकर नीचे भरी हुई कक्षा पर आ गिरा।

रेस्क्यू 1122 को गुरुवार सुबह 8:48 बजे पहली कॉल मिली और उसकी पहली टीम सात मिनट बाद पहुंच गई। सौ से ज़्यादा बचावकर्मियों ने मलबा हटाया और 89 लोगों को अस्पताल ले जाया गया।

स्कूल 16 मरला ज़मीन पर बना था, जो वहीद और जावेद नाम के दो लोगों की है। निर्माण शुरू होने से पहले 2024 में इसे पट्टे पर लिया गया था।

पेशावर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय की शुरुआती रिपोर्ट में ढांचे की कमज़ोरी और हाल की बारिश को वजह बताया गया है। रिपोर्ट कहती है, “पक्की वजह और ज़िम्मेदारी तय करने के लिए व्यापक तकनीकी और इंजीनियरिंग जांच ज़रूरी है।” प्रांतीय संचार और निर्माण विभाग की फॉरेंसिक टीमों ने चिनाई और सामग्री के नमूने लेने शुरू कर दिए हैं।

हर स्कूल की होगी जांच

प्रांतीय शिक्षा विभाग ने खैबर पख्तूनख्वा के हर ज़िले में जांच समितियां बनाई हैं। ये सरकारी स्कूलों और किराये की निजी इमारतों, दोनों की छत और बीम से लेकर नींव और सीढ़ियों तक की जांच करेंगी और तीन दिन के भीतर तुरंत मरम्मत, मज़बूती या बंद करने की सिफारिश देंगी।

मुख्य सचिव ने अलग से दो सदस्यों की एक समिति बनाई है, जिसकी अगुवाई परिवहन सचिव ज़ुबैर अहमद कर रहे हैं और संचार एवं निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता जमशेद अली खान इसके सदस्य हैं। इसे सात दिन में इमारत के ढांचे, निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा इंतज़ाम और किसी भी लापरवाही पर रिपोर्ट देनी है।

गवर्नर शासन के तहत प्रांत चला रहे गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने पिछली प्रांतीय सरकार पर आरोप लगाया कि उसने प्राइवेट स्कूल्स रेगुलेटरी अथॉरिटी कानून से वे प्रावधान हटा दिए जिनसे अधिकारी असुरक्षित स्कूलों को सील कर सकते थे। उन्होंने इस बदलाव को “आपराधिक कृत्य” कहा और चेतावनी दी कि गैरकानूनी अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने वाले नगर निकाय और शिक्षा अधिकारियों से जवाब लिया जाएगा।

हादसे के बाद कुंडी ने कहा, “हम अपने बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं होने दे सकते।” उन्होंने हर शोक संतप्त परिवार को 10 लाख पाकिस्तानी रुपये और हर घायल छात्र को 2 लाख रुपये देने की घोषणा की है।

बार-बार के हादसे

पेशावर का हादसा इस साल पाकिस्तान में हुए ऐसे कई हादसों में सबसे घातक है। जून में लाहौर के एक निजी ट्यूशन सेंटर की छत गिरने से 14 बच्चों की मौत हुई थी। जुलाई में सिंध के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की दीवार गिरने से तीन बच्चियों की जान गई और लाहौर में एक निर्माणाधीन निजी स्कूल में एक बच्चे की मौत हुई। इससे पहले डेरा गाज़ी खान ज़िले में एक कक्षा की छत गिरने से चार बच्चों की जान गई थी।